इसके एवज में 7500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। जिससे कई पंचायतों को फायदा होगा, चूंकि उनकी भूमि धान बुआई के लिए कम रेट पर ली जाती है। जहां बाढ़ग्रस्त क्षेत्र हैं, वहां के किसानों को कृषि विभाग को लिखित में देना होगा कि वे बासमती व चावल की कौन सी फसल की बुआई कर रहे हैं।
सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है कि मक्का, बाजरा व कपास का बीमा भी सरकारी खर्च पर होगा। फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ दो किस्तों में मिलेंगे। पहली किस्त फसल बुआई पर 2000 रुपये व दूसरी किस्त 5000 रुपये फसल पकने पर मिलेगी। 50 हॉर्स पावर की मोटर ट्यूबवेल पर लगाकर खेती करने वाले किसानों को धान बुआई न करने की सलाह दी गई है।
सुरजेवाला का ट्वीट
एआईसीसी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि हरियाणा के किसान की जीत हुई है। किसान और कांग्रेस का संघर्ष रंग लाया। उनकी मांग है कि सरकार 9 मई 2020 का धानबंदी का आदेश वापस ले। पंचायती जमीन पर धानबंदी की इजाजत दी जाए। दादुपुर-नलवी नहर शुरू करें।