नगर निगम के आडिट विंग ने 1524 ऐसे कामों की पहचान कर ली गई है, जिन पर अधिकारियों ने आपात स्थिति के काम बताते हुए 48 करोड़ 30 लाख रुपये खर्च कर दिए। आडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि आपात स्थिति में खर्च करने के बाद टंपरेरी सपोर्ट बाउचर एक माह के भीतर दिया जाना जरूरी है, लेकिन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भी दिए गए। इसके बावजूद खर्च की जानकारी नहीं दी।
इस कारण आडिट विभाग ने इंजीनियरिंग विंग के 24 जेई और एसडीओ का वेतन जनवरी माह से रोक दिया है। आडिट रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया है अगर कोई विवरण नहीं देता है तो उसकी रिकवरी उससे की जाए। बता दें कि यह खर्च वर्ष 2015 से मार्च 2016 के बीच किया गया है। आडिट रिपोर्ट के अनुसार एक माह के भीतर मंजूरी न लेना एक गंभीर मामला है। बता दें कि इस राशि में टंपरेरी एडवांस और टूरों के खर्च भी शामिल हैं।
वर्ष 2007 से 2015 तक निकाले 41 करोड़ रुपये
आडिट विंग ने वर्ष 2007 से 2015 तक इंजीनियरिंग विंग की ओर से एडवांस लिए जाने पर आपत्ति जताई है। इस कार्यकाल के दौरान इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों ने कामों के लिए 41 करोड़ की राशि निकाली, लेकिन किसी भी एडवांस की सफाई नहीं दी गई है।
अधिकारियों ने नहीं दी फोन और इंटरनेट की जानकारी
Municipal Corporation office Chandigarh
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अधिकारियों ने नहीं दी फोन और इंटरनेट की जानकारी
नगर निगम के अधिकारियों को अपने घर पर लैंड लाइन फोन, मोबाइल फोन, लैपटॉप, इंटरनेट रखने की मंजूरी है। आडिट विभाग ने इनकी जानकारी मांगी थी, लेकिन कोई भी अधिकारी इसे देने के लिए तैयार नहीं है। इस पर आडिट विंग रिपोर्ट में कह चुका है कि वह इसके लिए नवंबर 2015 और 25 जनवरी 2016 को रिमाइंडर भी भेज चुका है, लेकिन किसी ने भी कोई जानकारी नहीं दी है।
72 कर्मचारी नियुक्त करने की जानकारी नहीं दी प्रशासन को
आडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशासन के पर्सोनल विभाग ने नगर निगम में कंसलटेंट रखने की मंजूरी दी थी। इसकी जानकारी देनी जरूरी है, लेकिन नगर निगम ने ठेके पर 72 कर्मचारियों को प्रशासन के पर्सोनल विभाग की मंजूरी के बिना ही रख लिया। मालूम हो कि यह सभी कर्मचारी रिटायर्ड हैं, लेकिन वह नगर निगम में काम कर रहे हैं।