गांजबड़ गांव निवासी 22 वर्षीय युवक ने सिंगापुर का वीजा रद्द होने पर घर में फंदा लगाकर जान दे दी। वह दो महीने सिंगापुर में रहकर होली पर गांव लौटा और फिर से सिंगापुर जाना था। उसने फिर से सिंगापुर के वीजा के लिए आवेदन किया था लेकिन यह वीजा आवेदन रद्द कर दिया गया। जिसके बाद से वह परेशान था और शनिवार की दोपहर फंदा लगाकर जान दे दी।
संभावना जताई जा रही है कि कोरोना वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा महामारी घोषित किए जाने के बाद से कई देशों में ट्रैवल बैन है। ऐसे में कोरोना की वजह से उसका वीजा रद्द होने की संभावना है, हालांकि युवक के परिजनों को वीजा रद्द होने की वजह का पता नहीं है।
पुलिस की दी शिकायत में मां सुशीला ने बताया कि उसके बेटे रोहित की उम्र 22 वर्ष थी और कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी होने के बाद होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहा था। वह पिछले दो महीने से सिंगापुर में ही था और होली के कुछ दिन पहले ही घर लौटा था। त्योहार के बाद दोबारा सिंगापुर जाने के लिए बेटे ने वीजा के लिए आवेदन कर रखा था लेकिन यह वीजा कैंसल हो गया।
शनिवार की दोपहर 12 बजे वह काम से बाजार गईं थीं और शाम चार बजे लौटी तो घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी खटखटाने के बाद भी रोहित ने दरवाजा नहीं खोला। आसपड़ोस के लोग भी आ गए। पड़ोसियों की मदद से घर का दरवाजा तोड़ा गया। अंदर पहुंचे तो बेटे गाटर के जरिए फंदे से लटका मिला। सदर थाना पुलिस सूचना पर मौके पर पहुंची और शव को सामान्य अस्पताल पहुंचाया। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई की है।
पति की पहले ही मौत हुई, अब बेटा भी नहीं रहा
रोहित के पिता रमेश की 12 वर्ष पहले एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसकी मां ने उसे पढ़ाया और फिर होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी करवा रहीं थी, जिससे वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके। मां का आखिरी सहारा उसका बेटा भी अब इस दुनिया से चला गया।
बेटे का शव झूलता देख वहीं बैठ गई मां
जब मां सुशीला पड़ोसियों की मदद से किसी तरह घर के अंदर पहुंची तो बेटे का शरीर फंदे पर झूलता देखे वहीं बैठ गई। वह बेसुध हो गई, आस पड़ोस की महिलाओं ने उन्हें संभाला।