विवादों से समाधान योजना :
एक्सक्लूसिव :
- 15 नवंबर 2024 को विवादों से समाधान योजना शुरू की गई थी, केवल 574 ने ही जमा कराया बकाया
- 70 सेक्टरों में आ चुकी एन्हांसमेंट, 4981 को जमा कराने हैं एन्हांसमेंट के बकाया 202 करोड़ रुपये
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के प्लाॅट मालिकों पर अभी भी एन्हांसमेंट का बोझ है। एचएसवीपी ने करीब 4981 प्लाॅट धारकों से एन्हांसमेंट के रूप में 202.17 करोड़ से अधिक की बकाया रकम जमा करानी है, लेकिन अभी तक 101.15 करोड़ रुपये ही जमा हो सके हैं। यही कारण है कि विवादों से समाधान स्कीम (वीएसएस-2024) की तिथि पहले ही 14 मई से 30 जून 2025 तक बढ़ाई जा चुकी है।
एचएसवीपी की विवादों से समाधान योजना की बात करें तो प्रदेश के करीब 70 सेक्टरों में एन्हांसमेंट आई थी। प्लॉट धारकों को एन्हांसमेंट से राहत दिलाने के लिए 15 नवंबर 2024 में विवादों से समाधान योजना शुरू की गई थी। योजना का लाभ अभी तक 4981 में से 574 प्लॉट मालिक उठा चुके हैं। एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे ने बताया कि योजना का प्लाॅट मालिक लाभ उठा सकते हैं, सरकार ने प्लाॅट मालिकों को लाभ देने के लिए योजना की तिथि बढ़ाई है।
गणना के आधार पर 23 से 72 प्रतिशत तक ब्याज का लाभ
योजना से जुड़े मुख्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि दो प्रकार के बकाएदार हैं। पहले बकाएदार वह हैं, जिन्हें एक अप्रैल 2015 से पहले ही नोटिस दिए जा चुके हैं। दूसरे बकाएदार वह हैं, जिन्हें एक अप्रैल 2015 के बाद नोटिस दिए गए। इसलिए प्रदेश के संपदा कार्यालयों की गणना भी अलग-अलग है। इसमें किस सेक्टर में प्लाॅट है, प्लाॅट खरीदने के समय कीमत, कुल प्लाॅट पर एन्हांसमेंट से लेकर कुल जमा राशि भी गणना में देखी जाती है। ब्याज लगाकर बाद में गणना की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गणना के आधार पर योजना के तहत 23 से 72 प्रतिशत तक ब्याज का लाभ मिल रहा है।
सरकार की नीति और नीयत में खोट : यशवीर मलिक
हरियाणा स्टेट सेक्टर्स कन्फेडेशन के राज्य संयोजक यशवीर मलिक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार की नीति और नीयत में खोट है। एचएसवीपी के जो सेक्टर 15-20 वर्ष पहले ही बस चुके हैं, उन्हें एन्हांसमेंट के नाम पर नोटिस दिए गए। विवादों से समाधान योजना को लागू हुए करीब छह माह हो गए, लेकिन कुछ ही प्लाॅट धारकों ने ही रकम जमा कराई है। पहली बात तो यह है कि सेक्टरों के प्लाॅट धारकों को बकाएदार कहना गलत है, क्योंकि उन्होंने रकम जमा कराकर प्लाॅट खरीदे हैं। दूसरी बात यह है कि एन्हांसमेंट के बोझ से सरकार स्थायी रूप से राहत क्यों नहीं दिला रही।