मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले में ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) को लीड करने वाले मेजर सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। रेवाड़ी निवासी मेजर कर्मजीत सिंह यादव ने इंसाफ के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली है।
उनकी बहादुरी और साहस के लिए उन्हें राष्ट्रपति मेडल भी मिल चुका है, लेकिन राज्य सरकार ने सम्मान राशि व अवार्ड देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने उनसे कहा कि युद्घ नहीं हुआ था इसलिए अवार्ड और सम्मान राशि जारी नहीं की जा सकती।
याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हरियाणा सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। एडवोकेट पीएस राव गिरवर के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए मेजर कर्मजीत सिंह यादव ने कहा कि ऑपरेशन ब्लैक टारनेडो के दौरान उनके साहस और कार्यों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा वीरता पदक दिया गया था।
इस सम्मान के आधार पर उन्होंने हरियाणा सरकार के समक्ष रिप्रजेंटेशन देकर सम्मान राशि देने की अपील की थी। हरियाणा में प्रावधान है कि इस प्रकार वीरता का प्रदर्शन करने वालों को साढे पांच लाख रुपये दिए जाते हैं। इसी के आधार पर याची ने इस राशि के लिए दावा किया था। हरियाणा सरकार ने मेजर की अपील यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उसके द्वारा दिखाई गई वीरता युद्ध के समय में नहीं बल्कि शांति के दौर में थी।