1984 सिख कत्लेआम पीड़ित वेलफेयर सोसाइटी की महिला शाखा की गुरदीप कौर ने पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल पर आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा दिए गए अनुदान को राज्य में पीड़ित परिवारों तक नहीं पहुंचने दिया। 'अकाली सरकार ने कुछ कदम उठाए लेकिन वे पर्याप्त नहीं थे। पंजाब में लगभग 35,000 दंगा प्रभावित परिवार हैं और बादल सरकार ने केवल 3,000 को फ्लैट दिए'।
'चार आयोग, नौ कमेटी और दो एसआईटी को हत्याओं की जांच के लिए गठित किया गया था। क्यों? यह स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकारें दंगों में किसी एक की भूमिका को छिपाना चाहती थीं'
पूर्व आप नेता और वरिष्ठ वकील एचएस फुलका अदालत के मामलों में दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। उनका कहना है कि सिख विरोधी दंगों में शामिल नेताओं को दंडित करने के बजाय कांग्रेस ने उन्हें ऊपर उठाया और बढ़ाया है।
'नाम न छापने की शर्त पर पंजाब कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि दंगा पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की प्रतिबद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ था, उसका विरोध करने के लिए उन्होंने खुद संसद से इस्तीफा दे दिया था।'