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साढ़े तीन साल में 186 भ्रष्टाचारी पहुंचे सलाखों के पीछे, सजा पाने वालों में 139 अधिकारी

Tue, 22 May 2018 09:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
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जेल
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हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले साढ़े तीन साल में 139 भ्रष्टाचारी अफसरों व कर्मचारियों को सलाखें के पीछे पहुंचाया है। इसके अलावा 47 अन्य व्यक्ति भी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल पहुंचे हैं। विजिलेंस ने इन सभी के खिलाफ कोर्ट में ठोस पैरवी करते हुए इन्हे सजा करवाई है।

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पकड़े गए अधिकारियों व कर्मचारियों में राजस्व विभाग के 30, पुलिस विभाग के 25, शिक्षा विभाग के 16, विद्युत विभाग के 11, सहकारिता विभाग के 9, स्वास्थ्य विभाग के 8, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के 7, पशुपालन विभाग के 3, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के 3, जनस्वास्थ्य विभाग के 3, कृषि विभाग के 3, सिंचाई विभाग के 3, पंचायती राज विभाग के 2, श्रम विभाग के 2, वक्फ  बोर्ड के 2, खजाना विभाग के 2, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का एक, औद्योगिक विभाग का एक, न्याय एवं अधिकारिता विभाग का एक, आबकारी व कराधान विभाग का एक, खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग का एक, विकास एवं पंचायत विभाग का एक तथा न्याय प्रशासन विभाग का एक कर्मचारी शामिल है।

जबकि सजा पाने वाले कर्मचारियों में सबसे अधिक राजस्व, पुलिस और शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं और इन सभी मामलों में आरोपियों को अदालत द्वारा पांच साल तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक 482 आपराधिक मुकदमें विभिन्न अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध दर्ज किए गए हैं, जिनमें 389 छापे शामिल हैं। इन छापों में 39 राजपत्रित, 374 अराजपत्रित कर्मचारियों एवं 49 अन्य लोगों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। उन्होंने बताया कि इनके विरुद्ध भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमें दर्ज किए गए हैं।
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आईएएस, आईपीएस, एचसीए के खिलाफ चल रही जांच
वर्तमान में भी विजिलेंस की ओर से 455 नई जांचें दर्ज की गई है। जिनमें पांच आईएएस, एक आईपीएस, चार एचसीएस, एक एचपीएस, छह मुख्य अभियंता, छह अधीक्षक अभियंता, 45 कार्यकारी अभियंता, आठ तहसीलदार, सात नायब तहसीलदार व 47 उपमंडल अधिकारी, उपमंडल अभियन्ता, नगर अभियंता तथा अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें विरुद्ध पड़ताल जारी है। इनके विरुद्ध भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन तथा आय से अधिक संपति बनाने के आरोप हैं।

इस दौरान 276 जांचें पूर्ण कर ली गई और इन जांचों के आधार पर 60 राजपत्रित अधिकारी व 56 अपराजपत्रित अधिकारी और 71 अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध 49 आपराधिक मामले दर्ज किए जाने और 94 जांचों में दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने का सुझाव दिया है और 14 जांचों में आपराधिक मुकदमा व विभागीय कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया है।

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