व्यापारी को गन प्वाइंट पर किडनैप कर लूटने वाले आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से दोषी करार दिया गया।
तीनों दोषियों की सजा पर शुक्रवार को फैसला सुनाया जाएगा। इनमें एक दोषी ऐसा है, जो किडनैपिंग की वारदात के बाद 17 साल बाद अपने परिजनों से मिला था।
पुलिस केस के मुताबिक, सेक्टर-21 निवासी महेश कुमार शर्मा को कालका-जीरकपुर हाईवे पर सेक्टर-12 से 24 जून 2012 को किडनैप कर लिया गया था।
शर्मा लघुशंका के लिए सड़क किनारे कार रोककर जैसे ही बाहर आए, तीन युवकों ने उन्हें घेरकर गन प्वाइंट पर ले लिया और उनकी की फोर्ड आइकन कार में डालकर किडनैप कर लिया।
बनूड़-लांडरा रोड पर शर्मा को छोड़ने के बाद किडनैपर उनसे दस हजार रुपये, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल व गाड़ी लेकर फरार हो गए थे।
सेक्टर-5 थाने में केस दर्ज होने के बाद पुलिस की एक टीम ने इस वारदात के लिए मानसा निवासी सुखदेव सिंह, गुरदासपुर निवासी दलजिंद्र सिंह व होशियारपुर निवासी हरजीत सिंह को 11 जुलाई 2012 को गिरफ्तार किया था और उनके कब्जे से फोर्ड आइकन कार भी बरामद की गई थी। इन्हीं तीनों को अब कोर्ट ने दोषी करार दिया है।
स्कूल टाइम में बिछड़ा था, वारदात ने मिलवाया
दोषी सुखदेव सिंह मूल रूप से हिसार का रहने वाला है। वह 17 साल पहले घर से लापता हो गया था। सुखदेव के पकड़े जाने के बाद जब ट्रायल शुरू हुआ तो पता चला कि वह हिसार का रहने वाला है।
किसी तरह उसकी मां रज्जो को खोजा गया, जिसने कोर्ट में सुखदेव को पहचाना। इसी दौरान पता चला कि 17 साल पहले सुखदेव स्कूल से लौटा ही नहीं था। उसके परिजनों को 17 साल बाद अपने इस बच्चे को देखने का मौका मिला था।