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Chandigarh News: पंजाब में 168 बाल भिखारियों को किया रेस्क्यू

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब में बाल भिखारियों को मुख्य धारा में वापस लाने और उनके पुनर्वास के मकसद से सूबे की सरकार की आरे से शुरू की गई जीवनजोत 2.0 के तहत अब तक 168 बाल भिखारियों को रेस्क्यू किया जा चुका है। यह अभियान सूबे में जारी रहेगा।
इस संदर्भ में प्रेसवार्ता के दौरान सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि इस योजना पर अधिक तेजी, सुदृढ़ता व प्रभावशाली ढंग से काम किया जा रहा है। यह न केवल रेस्क्यू अभियानों तक सीमित है, बल्कि इसमें वैज्ञानिक पहचान, डीएनए परीक्षण, पुनर्वास और मुख्यधारा में एकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि बड़े शहरों में 125 जगहों पर दबिश दी गई और 168 बच्चों को भीख मांगने से बचाया गया। इनमें से 80 बच्चों की पहचान उनके माता-पिता व परिजनों को सुरक्षित सौंप दिया गया। उनसे यह भी सुनिश्चित करवाया गया कि वे दोबारा सड़कों पर नहीं लौटेंगे। जिन 88 बच्चों की पहचान नहीं हो सकी, उन्हें सरकार द्वारा संचालित बाल देखभाल गृहों में भेजा गया है जहां उन्हें शिक्षा, पोषण, आवास, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता दी जा रही है।
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कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
डॉ. कौर ने चेतावनी दी कि यदि कोई अभिभावक या संरक्षक बच्चे को दोबारा भीख मांगने को मजबूर करेगा, तो उसे अयोग्य संरक्षक घोषित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन गिरोहों या मानव तस्करों द्वारा बच्चों से जबरन भीख मंगवाई जा रही है, उनके खिलाफ भी कड़े पुलिस और कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार शीघ्र ही लुधियाना, अमृतसर, जालंधर, मोहाली और बठिंडा जैसे बड़े शहरों में ‘आश्रय केंद्र’ स्थापित करेगी, जहां बालिग भिखारियों को आवास, परामर्श और कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे बच्चों को भीख मांगने को मजबूर न कर सकें।
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