चंडीगढ़ में सेक्टर-17 में इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज का दफ्तर है। नियमों के अनुसार शहर के वह सभी बैंक, संस्थान व कंपनी जहां 20 से ज्यादा कर्मचारी हैं, उस कंपनी को हर तीन महीने में इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज को जानकारी भेजनी होती है।
देश भर में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। चंडीगढ़ भी इससे अछूता नहीं रहा है। रीजनल इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज भी आवेदकों को रोजगार नहीं दिला पा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ में वर्ष 2021 में नौकरी के लिए 1623 लोगों ने आवेदन किया, लेकिन इसमें से सिर्फ 6 लोगों को ही नौकरी मिली। महज 0.36 फीसदी। ये हालात चिंताजनक हैं।
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इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज एक ऐसा संगठन है, जो योग्यता और अनुभव के आधार पर रोजगार सहायता प्रदान करता है। चंडीगढ़ में सेक्टर-17 में इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज का दफ्तर है। नियमों के अनुसार शहर के वह सभी बैंक, संस्थान व कंपनी जहां 20 से ज्यादा कर्मचारी हैं, उस कंपनी को हर तीन महीने में इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज को जानकारी भेजनी होती है कि उन्होंने कितने कर्मचारियों को रखा और कितनों को निकाला। अगर किसी कंपनी को कर्मचारियों की जरूरत होती है तो भी वह इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज से संपर्क करते हैं।
वर्तमान में एक्सचेंज के पास 14235 रजिस्टर्ड उम्मीदवार हैं जिन्हें नौकरी की तलाश है। इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज के पास पंजाब यूनिवर्सिटी में भी जगह है। इन्हें करिअर गाइडिंग, स्कूलों में जागरुकता कार्यक्रम समेत कई तरह के कार्यक्रमों को चलाना होता है। कई वर्ष निष्क्रिय रहने के बाद अब पिछले कुछ समय से एक्सचेंज ने अपनी गतिविधियां शुरू की हैं और 12वीं कर चुके छात्रों को जोड़ा जा रहा है। उन्हें गाइड किया जा जाएगा कि भविष्य में किन क्षेत्रों में संभावनाएं हैं।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) पर पिछले सात साल में करोड़ों रुपये खर्चे गए, लेकिन नौकरी पाने वालों की संख्या काफी कम है। चंडीगढ़ में पीएमकेवीवाई के तहत 18730 युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनमें करीब 15 हजार युवाओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए जबकि नौकरी 6219 युवाओं को ही मिली। बाकी बेरोजगार घूम रहे हैं। जिन्हें नौकरी मिली भी थी, वो अब छोड़ चुके हैं क्योंकि कंपनियां उन्हें 10 हजार से 12 हजार रुपये ही दे रही थीं। प्लेसमेंट की संख्या को ज्यादा दिखाने के लिए भी फर्जीवाड़ा चल रहा है। युवाओं को नौकरी देने के एक महीने बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। ये सभी कौशल विकास के मिशन को पीछे खींचते जा रहे हैं।
बेरोजगारी दर में बिहार, दिल्ली, एमपी, राजस्थान से भी आगे है चंडीगढ़
भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार चंडीगढ़ में बेरोजगारी दर बिहार, दिल्ली, एमपी, राजस्थान समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से ज्यादा है। ताजा सर्वेक्षण के अनुसार चंडीगढ़ में बेरोजगारी दर 7.1 फीसदी है। ये काफी ज्यादा है। पड़ोसी राज्य पंजाब में 6.2 फीसदी, हरियाणा में 6.3, हिमाचल प्रदेश में 3.3, दिल्ली में 6.3 फीसदी है। इसके अलावा बिहार में 4.6 फीसदी, गुजरात में 2.2, महाराष्ट्र में 3.7, राजस्थान में 4.7, दादरा नगर हवेली और दमन व दीव में 4.2, जम्मू और कश्मीर में 5.9 और लद्दाख में 2.9 फीसदी है।
चंडीगढ़ इंप्लॉयमेंट एक्सचेंज के पास नौकरी के लिए आए आवेदन
वर्ष आवेदन नौकरी मिली
2016 2659 106
2017 2574 125
2018 2204 475
2019 2260 408
2020 1345 575
2021 1623 6 (नोट: वर्ष 2022 के आंकड़े अभी कंपाइल नहीं किए गए हैं)
वर्ष 2009 से 2014
आवेदन नौकरी मिली
25505 1147
वर्ष 2015 से 2022
आवेदन नौकरी मिली
16888 1692
26 जुलाई 2022 तक ई-श्रम पोर्टल पर चंडीगढ़ के 1,72,700 लोगों ने किया पंजीकरण
सरकार को रोजगार बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए
शहर में नौकरी की बेहद कमी है। नौकरी के लिए कई महीने इंतजार करना पड़ता है। अगर नौकरी मिलती भी है, तो वेतन बहुत कम मिलता है। उसमें से वह ठेकेदार के अंतर्गत होता है, तो उसमें से कुछ पैसे वह ले लेते हैं। ऐसे में बहुत कम पैसा बचता है। सरकार को रोजगार बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। मेरे जैसे कई युवा खाली बैठे हैं। -राहुल कुमार, धनास निवासी
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी
सरकार गलत नीतियों के कारण बेरोजगारी बढ़ी है। बेरोजगारी को खत्म करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नजर आ रही है। इसके अलावा हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी खामी है, जो देश में डिग्री होल्डर पैदा कर रही है जबकि युवाओं में स्किल पैदा करने की जरूरत है। साथ ही मानसिकता, किस्मत पर निर्भरता आदि भी बेरोजगारी के कई अहम कारण है। बेरोजगारी के साथ अंडर इंप्लॉयमेंट भी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। - प्रो. जगदीश मेहता, विशेषज्ञ