प्रियंका की उम्र 16 साल है। अभी आठ साल का खेल करियर है, लेकिन वह सौ से ज्यादा मेडल जीत चुकी है। यह मेडल और भी ज्यादा होते, अगर उसे पर्याप्त सुविधाएं मिल पाती। प्रियंका के पिता कृष्ण गुप्ता माली हैं। कमाई बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए बेटी को खेलने ज्यादा दूर नहीं भेज पाते। इसके बावजूद इस बेटी ने हिम्मत नहीं हारी है।
स्केटिंग में उसका हुनर ऐसा है कि देखने वाला दांतों तले उंगलियां दबा लेता है। भवन विद्यालय सेक्टर-15 में 11वीं की स्टूडेंट प्रियंका डिस्ट्रिक्ट और स्टेट लेवल पर आयोजित स्केटिंग चैंपियनशिप में हुनर दिखा चुकी है। पांच बार आर्थिक तंगी की वजह से वह नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले पाई।
एक बार मौका मिला तो किस्मत ने साथ नहीं दिया। पुणे में जनवरी-2015 में आयोजित स्केटिंग नेशनल चैंपियनशिप के दौरान प्रियंका चोटिल हो गई और उसे घर लौटना पड़ा। प्रियंका अब तक 114 पदक जीत चुकी है। सात साल से प्रियंका अपने विद्यालय में बेस्ट स्केटर का अवार्ड जीत रही है।
हर साल स्कूल फीस माफ
प्रियंका के पिता कृष्ण गुप्ता पंचकूला सेक्टर-15 स्थित भवन विद्यालय में माली हैं। खेल में अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से प्रियंका की फीस हर साल स्कूल माफ कर देता है। कृष्ण कुमार ने बताया कि स्केटिंग किट काफी महंगी है। इसके अलावा एक नेशनल गेम्स खेलने पर आठ-दस हजार रुपये का खर्च है, जो उनकी सैलरी के बराबर है। ऐसे में बेटी को आगे खेलने भेजना उनके लिए काफी मुश्किल हो जाता है।