इसके बाद जैन साध्वीगण दोनों बहनों को लेकर उन्हें रायकोट स्थित जैन स्थानक आ गई। जैन स्थानक रायकोट में ही दोनों बहनों ने अपनी शिक्षा जारी रखी। मुस्कान ने आठवीं कक्षा तक अपनी शिक्षा पूरी की और इसके बाद वैराग्य चोला अपना लिया। बड़ी बहन द्वारा वैराग्य दीक्षा लेने का प्रभाव तान्या पर भी पड़ा।
आखिरकार उन्होंने भी फैसला लिया कि वह भी वैराग्य दीक्षा लेगी। सांसारिक सुखों का त्याग करते तान्या गुरुणी सुमन की शिष्या के रूप में दीक्षा ग्रहण करेंगी। तान्या की केसर रस्म 27 जनवरी को रायकोट स्थित जैन स्थानक में हो चुकी है।
जैन धर्म के बारे में लिया पूरा ज्ञान
तान्या ने जैन धर्म के संबंध में पूरा ज्ञान हासिल किया। दीक्षा लेने से पहले जैन धर्म के संबंध में एक परीक्षा भी पास की। इसके बाद दीक्षा देने का फैसला लिया गया। तान्या प्रतिक्रमण, कर्मग्रंथ, नवत्व, 65 बोल, भक्तमाल स्त्रोत, सुखविपाक, गुणस्था और कंठस्थ का अध्ययन कर चुकी है।