प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को एक साथ कई तरह की तकलीफें महसूस होती हैं। इनमें से 16 तरह की तकलीफों से निजात दिलाने वाले घरेलू नुस्खों को पीजीआई में लंबी स्टडी के बाद इजाद किया गया है।
पीजीआई के गायनी विभाग व कम्युनिटी मेडिसिन की ओर से रूम नंबर 2060 में प्रेग्नेट महिलाओं को एक विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डा. अमरजीत सिंह, को प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर व गायनी विभाग के एचओडी डा. एलके धालीवाल, डा. एके मंडल, डा. वनीता सूरी, डा. वनीता जैन व डा. एके राणा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हर महिला को कोई न कोई तकलीफ होती है।
पेट में पल रहे बच्चे की वजह से शरीर पर जोर पड़ता है और यही बोझ तकलीफों के रूप में सामने आता है। इस रूम में ज्यादातर तकलीफों का इलाज बिना दवाई से किया जाता है।
प्रोजेक्ट स्टाफ डा. पूर्णिमा, डा. रुचि, इशा बजाज, प्रेरणा जॉन ने बताया कि ये ऐसी तकलीफे हैं, जो हर महिला के साथ होती है, लेकिन वे इसे रुटीन प्रक्रिया समझती है। इस कारण उनका दर्द बढ़ता रहता है।
ऐसा नहीं है कि इन बीमारियों का कोई तोड़ नहीं है। है, बस थोड़ी जानकारी की जरूरत है। जेसे, अगर जी मचल रहा है तो अदरक वाली चाय पी लें या पुदीना, नींबू व चीनी मिलाकर एक चम्मच दिन में तीन बार लें। ऐसे में न तो ज्यादा घी वाला खाना खाएं और न ही खाली पेट रहें।
अगर पीठ में दर्द हो तो जोर से सांस छोड़ें और पेट को अंदर खींच कर पांच सेकंड तक सांस रोकें। ऐसे में कंप्यूटर-लैपटॉप पर ज्यादा काम न करें।
टांगों में ऐंठन हो जाए तो दिन में तीन बार दूध का सेवन करें, लेकिन ज्यादा देर तक खड़े होने से बचें। नसों में सूजन हो जाए तो पैरों के नीचे तकिया रखकर सोएं और पांवों की कसरत करें, लेकिन अगर पैर में चोट लगी तो कसरत बिल्कुल न करें। न ही ज्यादा देर तक एक स्थिति में बैठे रहें।
कब्ज हो जाए तो सुबह एक गिलास गुनगुना पानी पिएं और ज्यादा से ज्यादा तरल चीजों का सेवन करें। न तो ज्यादा कॉफी पीएं, न ही चाय।
गले में जलन होने पर सोने से दो घंटे पहले खाना खाएं, लेकिन तला हुआ और भारी खाना खाने से बचें।
बवासीर होने पर कब्ज न होने दें और एक तरफ करवट लेकर ही सोएं। ऐसे में शौच के समय ज्यादा जोर नहीं लगाना चाहिए। साथ ही चिकित्सक की सलाह से कोई दवाई लेनी चाहिए।
शरीर में सूजन हो जाने पर कुछ दिन के अंतराल पर बीपी चैक करात रहें और चिप्स, कोल्डड्रिंक, मीट आदि के सेवन से बचें।
नींद न आने पर हल्का संगीत सुनें। ज्यादा पेशाब आता हो तो कूल्हे की मांसपेशियों की कसरत करें। त्वचा में बदलाव आ रहा हो तो पानी खूब पीएं, लेकिन पेट पर खारिश न करें।
बेहोशी की स्थिति में ठीक समय पर खाना-पीना करें। टाफी, चाकलेट खाएं। तंग कपड़े भी न पहनें। सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो दर्जी वाली कसरत करें और कोई भी भारी काम न करें। थकावट होने पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद पांव ऊपर करके बैठे।