जी-20 सम्मेलन का विरोध करते किसान।
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पंजाब में किसान संगठनों ने G-20 शिखर सम्मेलन का विरोध करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को अमृतसर-बठिंडा राजमार्ग पर अर्थी फूंक प्रदर्शन किया। किसान नेताओं का कहना है कि भारत सरकार की मेजबानी में जी-20 शिखर सम्मेलन के तहत चल रही बैठकों के विरोध में 16 किसान-मजदूर संगठनों ने निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में 380 स्थानों पर केंद्र सरकार के पुतले फूंके हैं। 16 संगठन 28 सितंबर से ट्रेन रोको आंदोलन का पहला चरण पंजाब से शुरू करेंगे।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि जी-20 देशों का समूह कॉरपोरेट समर्थक और गरीब व मध्य वर्ग विरोधी नीतियों के तहत काम कर रहा है और आर्थिक विकास व स्थिरता के नाम पर बड़े देश भारत जैसे विकासशील देशों के प्राकृतिक संसाधनों जैसे खनिज, जल, जंगल, जमीन, परिवहन के साधन और सस्ते श्रम समेत अन्य संसाधनों का शोषण कर रहे हैं। इसका किसान मजदूर संगठन पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार एक तरफ सांप्रदायिकता की कुल्हाड़ी चलाकर देश को तोड़ने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ पिछली सरकारों से दो कदम आगे बढ़कर कॉरपोरेट परस्त नीतियां लागू करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार समर्थक मीडिया दिल्ली में इस सम्मेलन के लिए रास्ता रोककर आम लोगों को होने वाली परेशानी के बारे में बात नहीं कर रहा है।
मोगा में भी किसानों का प्रदर्शन
मोगा में भी शुक्रवार को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने जी-20 समेलन का विरोध किया। मोगा में पांच जगहों पर मोदी सरकार का पुतला फूंककर रोष प्रदर्शन किया गया। भारी संख्या में किसान रोष प्रदर्शन में पहुंचे। इस मौके पर किसानों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेताओं ने कहा की जी-20 सम्मेलन किसानों, मजदूरों और दुकानदारों के लिए घातक है। बड़े देशों की कंपनियां ने जी-20 के सम्मेलन में आ रही हैं। ये देश के छोटे कारोबारी और किसानों को खत्म करने की साजिश रच रही है। छोटे दुकानदारों को खत्म करने के लिए यहां बड़े बड़े मॉल खुलेंगे। यह सब कारोबार कॉरपोरेट घरानों के नीचे आ जाएंगे।