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आधार कार्ड के जरिए तीन माह बाद खुशी को मिले उनके मां बाप

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आधार कार्ड ने तीन महीने बाद मां-बाप से मिलवाई खुशी
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24 जुलाई को भीड़ में खो गई थी पांच साल की मासूम, पुलिस ने परिजनों से संपर्क कर सुरक्षित घर भेजा
मानव तस्करी निरोधक पंचकूला टीम ने की बच्ची के परिजनों की तलाश
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। स्टेट क्राइम ब्रांच मानव तस्करी निरोधक (एएचटीयू) पंचकूला टीम ने तीन माह पहले पांच वर्ष की जुदा हुई खुशी को उसके माता पिता से मिलवा दिया। वीरवार को सेक्टर-12ए स्थित बाल सदन में एएचटीयू की टीम ने बच्ची को कानूनी कार्यवाही के बाद परिजनों को सौंप दिया। एसआई मुकेश रानी ने बताया कि 25 जुलाई को यह बच्ची अंबाला रेलवे स्टेशन पर मिली थी। यह अपने माता पिता से बिछुड़ गई थी। रेलवे स्टेशन की साइड टीम ने सीडब्ल्यूडी के आदेश पर पंचकूला स्थित बाल सदन में इस बच्ची को पहुंचा दिया था, जिसके बाद उनकी पूरी टीम एएसआई राजेश, हैड कांस्टेबल कर्मचंद और लेडी कांस्टेबल कविता बच्ची के परिवार की तलाश में जुट गए। मुकेश रानी ने बताया कि जब उन्होंने बच्ची की काउंसलिंग की तो उसने अपना नाम प्रीति बताया। पिता का नाम बब्बू बताया, इसके अलावा बच्ची कुछ भी नहीं बता पाई थी। इसके बाद उनकी पूरी टीम आसपास के सभी शहरों के थानों में गुमशुदगी के दर्ज हुए मामलों में प्रीति के नाम से दी गई शिकायत को तलाशने लगे, लेकिन प्रीति के नाम से किसी भी थाने में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं थी, जिसके बाद वह बच्ची को सेक्टर-एक स्थित आधार कार्ड केंद्र लेकर गए। वहां उन्होंने ने बच्ची का आधार कार्ड अप्लाई किया। अप्लाई करने के बाद पता चला कि बच्ची का आधार कार्ड बनकर आया तब उसके बाद चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित आधार कार्ड के हेड ऑफिस से पता चला कि बच्ची का पहले ही आधार कार्ड बना हुआ है फिर वहां से बच्ची का पूरा पता निकलवाया। आधार कार्ड के रिकार्ड के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार बच्ची का असली नाम खुशी है और खुशी जिला पटियाला, थाना आजाद नगर की रहने वाली है, जिसके बाद उन्होंने कंट्रोल के जरिए बच्ची की फोटो को आजाद नगर पुलिस थाने में भिजवाया। थाने के एएसआई ने बताया कि इस बच्ची की शिकायत हमारे पास दर्ज है। उसके बाद आजाद नगर एएसआई खुशी के माता-पिता को साथ लेकर पंचकूला स्थित बाल सदन पहुंचा और सभी आईडी प्रूफ चैक करने के बाद मानव तस्करी निरोधक टीम ने बच्ची को माता-पिता के सौंप दिया। खुशी के माता-पिता ने बताया कि वह 24 जुलाई को बच्चों के साथ मार्केट में शॉपिंग के लिए गए थे। बाजार में भीड़ के कारण उनसे खुशी का हाथ छूट गया। थोड़ी देर बाद खुशी हमें नहीं मिली। खुशी को बाजार में तलाश करने के बाद वापस घर पर भी इंतजार किया, लेकिन खुशी की कोई खबर नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने आजाद नगर थाने में खुशी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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मानव तस्करी निरोधक टीम की इंचार्ज मुकेश रानी ने बताया कि आधार कार्ड के मिलान के कारण हमारे लिए बच्ची का पता ढूंढना बहुत आसान हो गया अगर बच्ची का आधार कार्ड पहले से न बना होता तो हमे बच्ची को उसके माता पिता से मिलाने में शायद और अधिक समय लग जाता है।
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