400 लोगों को करीब नौ साल बाद भी नहीं मिला फ्लैट का पजेशन
सेक्टर-तीस के भूमि ग्रीन हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट्स के लिए लोगों ने इन्वेस्ट किया था
- 2009 से 2011 तक फ्लैट के 80 फीसदी तक जमा करवा चुके हैं पैसे
- सीएम विंडो में भी एसोसिएशन ने दी शिकायत, फिर भी नहीं हुई सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
करीब नौ से दस साल पंचकूला सेक्टर-तीस में भूमि ग्रीन हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट के लिए इन्वेस्ट करने वालों को पजेशन ना मिलने पर लोगों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। करीब चार सौ फ्लैट खरीददारों को फ्लैट की कुल कीमत का 80 फीसदी पैसा देने के बाद भी पजेशन नहीं मिला और वे आज भी फ्लैट के पजेशन के इंतजार में बैठे हैं, ताकि उन्हें उनका आशियाना मिल जाए।
ग्लोबल लैंड मास्टर बॉयर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान कश्मीर सिंह सैनी का कहना है कि लोगों ने फ्लैट लेने के लिए 2009 में इन्वेस्टमेंट की थी। आठ टावर्स में से चार टावर्स में बनने वाले 400 फ्लैट की बिल्डर बिक्री कर चुका है। इनमें टू बीएचके, थ्री बीएचके, थ्री प्लस वन बीएच के शामिल हैं। इनकी कीमत 30 लाख रुपए से 85 लाख तक रखी गई थी। ज्यादातर बायर्स फ्लैट की कीमत का करीब 80 परसेंट बिल्डर्स को जमा करा चुके हैं। इन लोगों को 2012-13 में फ्लैट का कब्जा मिलना था। बिल्डर हर बार पूछने पर जल्द ही पजेशन देने का वादा करता है। इन लोगों का कहना है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट, हरियाणा ने राइट टू इंफॉरमेशन के तहत मांगी जानकारी में बताया कि बिल्डर ने प्रोजेक्ट का लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया है और न एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेस जमा कराए हैं। बिल्डर ने 31 दिसंबर, 2017 तक के 40 करोड़ रुपए ईडीसी के जमा कराने थे। साइट का बिल्डिंग प्लान अप्रूव न होने के कारण इस प्रोजेक्ट को भी मंजूरी नहीं मिली है। प्रोजेक्ट में फ्लैट लेने के लिए पैसे जमा कराने वाले रवि बंसल का कहना है कि ग्लोबल लैंड मास्टर्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से भूमि ग्रीन नाम से यह हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसमें 400 फ्लैट बेचे जा चुके हैं, जिन्हें फ्लैट नहीं दिया जा रहा है। हर बार बिल्डर कोई न कोई बहाना बनाकर जल्द ही पजेशन देने की बात कहता है। लोगों को 2012-13 में फ्लैट मिलने थे। इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन खत्म हुए भी पांच साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। अभी भी नहीं पता कि फ्लैट कब मिलेंगे। एसोसिएशन के सेक्रेटरी बीआर कपूर का कहना है कि फ्लैट लेने वालों में ज्यादातर सीनियर सिटीजंस हैं जो पजेशन न मिलने से परेशान हैं। कुछ लोगों ने फ्लैट लेने के लिए लोन ले रखा है। वह बैंक की किश्तें भी भर रहे हैं। अपना फ्लैट न मिलने के कारण किराया भी दे रहे हैं। इन्होंने अलग-अलग जगह किराये पर मकान ले रखा है। खर्चे ज्यादा बढ़ने से उनकी रिटायरमेंट लाइफ में परेशानी बढ़ गई है।