नोएडा हरियाणा के ध्यानार्थ
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‘मोदी दोस्ती कप’ में हिस्सा लेने पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में पहुंचे गुरदास हैं कमाल के गेंदबाज
आसान नहीं है गुरदास की गेंदों का सामना करना
नेट प्रैक्टिस के दौरान उड़ा दी थीं सचिन की गिल्लियां
धोनी, विराट और गंभीर आदि भी हैं गुरदास के मुरीद
तेज गेंदबाज के रूप में दिव्यांगों की टीम में बनाई जगह
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
एक हाथ से दिव्यांग गुरदास की प्रतिभा के बारे में जानेंगे हैरान हुए बिना न रह सकेंगे। नागपुर के गुरदास की बॉलिंग के सचिन, धोनी ही नहीं विराट कोहली भी मुरीद हैं। नेट बॉल प्रैक्टिस के दौरान गुरदास ने सचिन तेंदुलकर का विकेट ही उड़ा दिया था। तब सचिन ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा था-वेलडन। कीप इट अप। वे डेविड मिलर को भी कैच आउट कर चुके हैं। गुरदास महाराष्ट्र की टीम के कैप्टन हैं और इन दिनों भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाले तीन दिवसीय टेस्ट मैच ‘मोदी दोस्ती कप’ में हिस्सा लेने पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में पहुंचे हैं। यह कप 30 मार्च से एक अप्रैल तक खेला जाएगा। महाराष्ट्र टीम को गुरुदास पिछले 15 साल से लीड कर रहे हैं, जिसमें टीम 14 बार राष्ट्रीय विजेता रह चुकी है। पांच बार इंरटरनेशनल मैच गुरुदास की टीम जीत चुकी है। 2012 में पहली बार गुरदास के नेतृत्व में ही भारत ने पाकिस्तान को हराया था।
आज भी कानों में गूंजते हैं सचिन के शब्द
गुरदास बताते हैं कि टीम इंडिया नागपुर में मैच खेलने पहुंची थी। उन्हें नेट प्रैक्टिस के दौरान सचिन तेंदुलकर को बॉलिंग करने का मौका मिला। इसी दौरान उन्होंने सचिन को बोल्ड कर दिया। यह नजारा देखकर धोनी और विराट कोहली ने भी उनकी तारीफ की। सचिन ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा-कि वेलडन कीप इट अप। इसके बाद उनका हौसला और बढ़ गया। आज तक सचिन के शब्द उनके कानों में गूंजते हैं।
बचपन में जिन्होंने मजाक उड़ाया, वे फख्र करते हैं
गुरदास कहते हैं कि बचपन में लोग मेरा मजाक उड़ाते थे। कहते थे-बायें हाथ के साथ क्रिकेटर कैसे हो सकता हूं। आज वही लोग मेरी मिसाल देते हैं। गुरदास ने बताया कि एक दिन मैं रेशमी बाग क्रिकेट ग्राउंड (एक स्थानीय क्लब) के पास खड़ा अपने दोस्तों के साथ चाय पी रहा था। मैदान में बल्लेबाज ने गेंद को हिट किया। गेंद हमारी ही तरफ आ रही थी। मुझे यह समझते देर नहीं लगी कि अगर गेंद को नहीं पकड़ा गया तो किसी को चोट लग सकती है. मैंने चाय का कप फेंका और एक हाथ से गेंद को कैच कर लिया। लेदर की गेंद से यह मेरा पहला परिचय था। इसके बाद उत्तम सर ने मेरा नाम क्लब के लिए रजिस्टर कर लिया। मुझे कोच ने जरूरी सामान उपलब्ध कराया। इसके बाद सफर शुरू हो गया।
हौसलों की उड़ान अभी बाकी
गुरदास राउत ने तेज गेंदबाज के रूप में दिव्यांग की टीम में जगह बनाई और कमान भी संभाली। गुरुदास ने एक हाथ से तैैराकी कर कई स्पर्धाएं भी जीतीं। वहीं राष्ट्रीय टूर्नामेंट में दिव्यांग द्वारा हैट्रिक का कीर्तिमान भी गुरुदास के नाम है। भारत के तमाम अग्रणी क्रिकेटर सचिन तेंदुुलकर, कपिल देव, महेंद्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली, गौतम गंभीर, विराट कोहली ने उन्हें सराहा है।
2006 के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
गुरदास ने 2006 में महाराष्ट्र टीम के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। निजी खिलाड़ियों से लेकर दिग्गजों ने भी राउत की प्रशंसा की है। वह पाकिस्तान के खिलाफ हुई वन डे सीरीज में टीम के साथ था। यह सीरीज भारत ने 3-0 से जीती थी। यहां टीम इंडिया ने इकलौता टी 20 भी जीता था। फिलवक्त अपनी टीम के उपकप्तान राउत दो तीन घंटे नियमित प्रशिक्षण लेते हैं।