हरियाणा के सरकारी महकमों में कार्यरत दलित कर्मियों ने भी एससी-एसटी उत्पीड़न अधिनियम को कमजोर किए जाने के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। दो अप्रैल को लगभग एक लाख दलित कर्मी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। अनुसूचित जाति-जनजाति उत्पीड़न अधिनियम के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरोध में अनुसूचित जाति संगठनों के आह्वान पर भारत बंद में शामिल होंगे।
जिलास्तर पर प्रदर्शन कर डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व पीएम नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजकर अधिनियम को यथावत बनाए रखने की मांग की जाएगी। हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश प्रेस सचिव भूप सिंह ने कि हजरस की राज्य कार्यकारिणी ने भारत बंद का समर्थन किया है। राज्य प्रधान प्रेम बाकोलिया और महासचिव बलजीत सिंह दाहिया ने कहा कि हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ-388 (हजरस) के सभी सदस्य 2 अप्रैल को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
इसके साथ ही अन्य विभागों के कर्मचारियों ने भी वीरवार को हुई बैठकों में सामूहिक अवकाश पर रहने के लिए आश्वस्त किया है। सभी संगठन एकजुट होकर राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे। कर्मचारियों की योजना प्रदेश के सांसदों को भी ज्ञापन देने की है ताकि वे संसद में उनकी मांग को उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 को पंगु बनाने की बजाय और अधिक कठोर करे।
केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालकर अधिनियम को सशक्त करने का हल्फनामा देना चाहिए। जब तक नया कानून न बने तब तक पुराना अधिनियम ही लागू रहे, ताकि इस वर्ग में व्याप्त भय दूर हो। चूंकि, दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के बढ़ते मामले किसी से छुपे नहीं हैं।