महिलाओं के लिए मिसाल हैं पंचकूला की अमिता
- झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को फ्री में देती हैं मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग
- ट्राइसिटी, दिल्ली, नेपाल, गाजियाबाद, श्रीलंका, कोरिया की प्रतियोगिताओं में ले चुके हैं भाग
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
भले ही आज समाज में नारी को पुरुषों के बराबर दर्जा देने की बात की जाती हो, लेकिन वास्तविकता यही है कि स्त्रियों को उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है। इससे इतर कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो अपने मजबूत इरादों से इस धारणा को तोड़ रहीं हैं और लोगों के लिए मिसाल कायम कर रही हैं। ऐसी ही एक महिला हैं पंचकूला की अमिता मारवाह। जो झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों की जिंदगी संवारने में जुटी हैं। ताकि इन बच्चों को रोजगार मिले और ये किसी के सामने आने वाले समय में हाथ न फैलाएं।
अमिता ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि पैसे की कमी के चलते ये बच्चे खेल में भाग नहीं ले पाते। तब हौसला डगमगाता है, लेकिन फिर अगले दिन सुबह उम्मीद की नई किरणों के साथ उठती हूूं और इन बच्चों के कैरियर को संवारने में जुट जाती हूं।
वह 2011 से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रही हैं, उन्होंने बताया कि इन बच्चों को बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी मिल पाती है। अमिता सिर्फ इसी उम्मीद के साथ इन बच्चों को ट्रेनिंग दे रही है कि एक दिन ये बच्चे खेल में अच्छा प्रदर्शन करेंगे और अपने देश का नाम रोशन करेंगे। साथ ही इनका कैरियर भी बनेगा और अपने परिवार को बेहतर जिंदगी दे पाएंगे। अब तक ट्राइसिटी, दिल्ली, नेपाल, गाजियाबाद, श्रीलंका, कोरिया तक जा चुके हैं अमिता के स्टूडेंट्स। अमिता इन बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग देती हैं।
पैसे की कमी आती है बच्चों के मंजिल के आड़े:
अमिता ने बताया कि जब वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती थी तो कई उनके दोस्त ऐसे थे, जो पैसे की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। इसलिए उन्होंने फैसला लिया कि उन बच्चों को आगे बढ़ाऊंगी जिनके पास प्रतिभा तो है लेकिन पैसे की कमी उनके प्रतिभा के आड़े आ जाती है। दस साल से मार्शल आर्ट से जुड़ी हूं। हमारा लक्ष्य है कि इन गरीब बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचाऊं। मेरी इच्छा है कि ये बच्चे सेल्फ डिपेंडेंट हो जाए। इन्हें खेल के आधार पर नौकरी मिले।
सरकार से मदद की उम्मीद:
अमिता ने बताया कि वह चाहती हैं कि सरकार उनके काम को देखे, जब भी बच्चे वर्ल्ड, एशियन गेम्स के लिए चयनित हों तो उनका पूरा खर्च उठाए। उन्होंने बताया कि वह पंचकूला में सुबह ढ़ाई से साढ़े तीन और हल्लोमाजरा में साढ़े पांच से सात बजे तक बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देती हैं। इस काम में अमिता की मदद आशीष, कमलेश और सूजर करते हैं। ये युवा ट्रेनर इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारते हैं। अमिता ने बताया कि इस काम में उनकी बड़ी बेटी हिमांशी स्टेट रैफरी हैं। वह भी इन बच्चों को ट्रेनिंग देने में मेरा साथ देती है।