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अब सरस मेले की शोभा बढ़ाएंगी टेराकोटा हस्तशिल्प की सुंदर कलाकृतियां
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- पौराणिक सीरियलों और फिल्मों के सेट पर टेराकोटा की कलाकृतियों का होता हैं इस्तेमाल
- टेराकोटा : आपके ड्राइंग रूम की सजावट से फिल्मों के सेट डिजाइन में काम आने वाली कला

दीपक शाही
पंचकूला।
फरीदाबाद के टेराकोटा हस्तशिल्प की सुंदर कलाकृति सबका ध्यान खींच लेती हैं। इन्हें बनाने वाले कई कुम्हारों को इसी कला की वजह से सात समंदर पार जाने का मौका भी मिल चुका है। इनके हाथों का जादू अब हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है। इनमें से कुछ कुम्हारों को नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।
ये कलाकार इस समय पंचकूला सेक्टर-पांच सरस मेला अपनी कलाकृतियां लेकर पहुंचे हैं। बता दें कि आग में लाल मिट्टी को पकाकर उससे तरह-तरह के बर्तन, कलाकृतियां, मूर्तियां और सजावटी सामान बनाने की कला टेराकोटा भारत के कई हिस्सों में जानी-मानी हस्तकलाओं में से एक है। टेराकोटा शैली में बने मिट्टी के बर्तन भारत में 3000-1500 ईसा पूर्व की मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिले थे, टेराकोटा हस्तकला भारत में हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ती हुई कला है। इस कला ने कुम्हारों के जीवन को न सिर्फ सुधारा है बल्कि उन्हें अपने काम को देश के कई हिस्सों में पहुंचाने का रास्ता भी खोला है। भारत में सबसे पहले टेराकोटा कला की शुरूआत गुजरात के कच्छ में हुई। इसके बाद यह कला पंजाब और हरियाणा के कुम्हारों ने अपनाई।
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लक्ष्मण का कहना है कि उनके पिता कुम्हार का काम करते हैं और उनकी देखरेख में ही वह बचपन से टेराकोटा का काम करता आ रहा है और इस काम के लिए उनके पिता दया राम को एक बार इंटरनेशनल अवार्ड, तीन बार गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की ओर से नेशनल अवार्ड और बारह बार हरियाणा स्टेट अवार्ड मिला चुका है।

फिल्मों के सेट पर ऐतिहासिक टेराकोटा की कलाकृतियों का इस्तेमाल:
टेराकोटा हस्तकला के सामानों का व्यापार कर रहे व्यवसायी लक्ष्मण बताते हैं टेराकोटा से बने सामानों की मांग दिल्ली, पंजाब और मुंबई में बहुत ज्यादा है। आजकल पौराणिक सीरियल और इतिहास पर बनने वाली फिल्मों में सेट डिजाइनिंग मैटीरियल के तौर पर टेराकोटा से बनी मूर्तियों और सामानों की डिमांड बहुत होती है। इस कला से बनाए गए सामान की कीमत पांच हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक होती है।
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आठ बार मिला स्टेट अवार्ड:
पिछले पंद्रह सालों से टेराकोटा से कलाकृतियां और बर्तन बनाने वाले मेवात के श्रीचंद प्रजापति को आठ बार स्टेट अवार्ड के खिताब से नवाजा जा चुका है। वह अपनी कलाकृतियां रांची, झारखंड, लखनऊ, हिमाचल मंडी, गुजरात और कुरुक्षेत्र में प्रदर्शित कर चुके हैं।
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