अब मरीजों को जनरल अस्पताल में बर्न और ट्रामा वार्ड की मिलेंगी सुविधाएं
- दोनों वार्डों में सेटअप तैयार, ट्रामा वार्ड में मरीजों को दाखिल किया, हर वार्ड में होंगे छह बेड
- एक बेड की कीमत है एक लाख रुपये, धड़कन की जांच करने वाले मॉनिटर भी लगेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
अब जिले के बर्न और हेड इंजरी के मरीजों को चंडीगढ़ पीजीआई और जीएमसीएच के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। क्योंकि ये दोनों सुविधाएं पंचकूला के जनरल अस्पताल में मरीजों को मिलेंगी। ये दोनों वार्ड अस्पताल की इमरजेंसी से महज दस कदम की दूरी पर तैयार किए गए हैं। दोनों वार्डों में आईसीयू लेवल के बेड और मॉनिटर लगाए गए हैं। इसके अलावा बर्न केस के लिए एक सेपरेट ड्रेसिंग रूम भी तैयार किया गया है। बता दें कि इससे पहले ये सुविधाएं अस्पताल में नहीं होने से सड़क हादसे के दौरान चोटिल हेड इंजरी और बर्न केसों को पीजीआई चंडीगढ़ और जीएमसीएच रेफर किया जाता था, लेकिन अब मरीजों का अस्पताल में ही उपचार करा सकेंगे।
सीएम ने लिया था फैसला
18 अक्तूबर की रात को पंचकूला के सेक्टर 10 में गैस सिलेंडर फटने से सात लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सेक्टर-छह स्थित जनरल अस्पताल में अलग से बर्न वार्ड खोलने के आदेश दिए थे। कंज्यूमर एसोसिएशन के प्रधान एनसी राणा, महासचिव वीके शर्मा, एडवोकेट वीरेंद्र गर्ग और अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर बताया था कि दीवाली से पूर्व रात को अचानक गैस सिलेंडर लीक होने के बाद जैसे ही मकान मालिक अजीत चौधरी ने घर खोला तो ब्लास्ट हो गया था, जिसमें सात लोग झुलस गए। जिन्हें जनरल अस्पताल सेक्टर-छह पहुंचाया, लेकिन उन्हें समय पर इलाज नहीं मिलने से पीजीआई, सेक्टर-32 जीएमसीएच और अन्य प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा था। हादसे के तीन से चार दिन बाद ही सभी सातों झुलसे लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने हैरानी व्यक्त की और उन्होंने इस वार्ड के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नियुक्त करने के पीएमओ डॉ. संजीव त्रेहन को निर्देश भी दिए।
बर्न और ट्रामा वार्ड में है छह-छह बेड
बर्न और ट्रामा वार्ड के लिए छह-छह बेड के वार्ड तैयार किए गए हैं। इसमें लगे एक बेड की कीमत करीब एक लाख हैं। इसके अलावा पल्स जांचने के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) मॉनिटर वर्क वार्ड में लगाया गया है। पीएमओ ने अस्पताल के सर्जनों की ड्यूटी भी लगा दी है। वहीं ऐसे मरीजों के लिए एंबुलेंस का अलग से प्रावधान किया है।
इसलिए जरूरी है मॉनिटर
- रेग्यूलर हार्ट बीट देखने के लिए
- ब्लड प्रेशर की जांच के लिए
- ऑक्सीजन का सेचुरेशन मॉनिटर करने के लिए
- शरीर का तापमान का पता करने के लिए
- ईसीजी (इलेक्ट्रो कॉर्डियोग्राफी) के लिए
क्या कहना है पीएमओ का
पीएमओ डॉ. संजीव त्रेहन ने बताया कि पंचकूला के जनरल अस्पताल में बर्न और ट्रामा वार्ड तैयार किया गया है। दोनों वार्डों में आईसीयू बेड और मॉनिटर भी लगा दिए गए हैं।