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Chandigarh News: डडूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में 15 हजार टन कचरा जमा, 110 करोड़ खर्च पर जांच

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अमर उजाला की खबर के बाद चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने दिए जांच के आदेश, 48 घंटे में नौ बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
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मशीनरी बंद रहने से लेकर टेंडर, खर्च और निगरानी तक की होगी पड़ताल हाईकोर्ट में 15 नवंबर 2026 तक कचरा प्रोसेस करने का दिया है भरोसा
चंडीगढ़। डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ और बंद पड़ी प्रोसेसिंग मशीनरी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बायो-माइनिंग, मशीनरी और ऑपरेशन पर 110 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद यहां करीब 15 हजार मीट्रिक टन मिक्स्ड वेस्ट जमा है। इसमें रोजाना 80 से 90 टन नया कचरा भी जुड़ रहा है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने फैक्ट-फाइंडिंग जांच के आदेश दिए हैं। 14 अक्तूबर को जारी आदेश में 48 घंटे के भीतर नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है।
जांच की जिम्मेदारी सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पब्लिक हेल्थ-कम-ओवरऑल इंचार्ज सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को सौंपी गई है। आदेश में मौजूदा स्थिति को अस्वीकार्य बताते हुए ऑपरेशनल प्लानिंग, कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट और निगरानी में गंभीर कमियों की आशंका जताई गई है। मामले को ‘मोस्ट अर्जेंट’ श्रेणी में रखा गया है। तय समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने पर नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। अमर उजाला में प्रकाशित ‘खड़ी मशीनें, दौड़ते बिल’ खबर के बाद भी चीफ इंजीनियर ने 72 घंटे में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी। अब दोनों मामलों की जांच से खर्च, कामकाज और निगरानी की जवाबदेही स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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मशीनों से टेंडर तक, नौ बिंदुओं पर जांच
जांच अधिकारियों को डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरे का भौतिक सत्यापन कर पुराना और नया कचरा अलग-अलग दर्ज करना होगा। मशीनों की स्थिति, उनके बंद रहने की अवधि, कारण और जिम्मेदारी तय करनी होगी। तीन बार टेंडर रद्द होने और ठेकेदार के काम शुरू नहीं करने के कारणों की भी पड़ताल होगी।
इसके अलावा पिछले 30 दिन में आए, प्रोसेस हुए और बचे कचरे का आंकड़ा वेट ब्रिज और वाहनों के रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। बायो-माइनिंग, मशीनरी, संचालन और रखरखाव पर खर्च हुए 110 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के मुकाबले जमीनी प्रगति का आकलन होगा। लीचेट, बदबू, निगरानी में कमी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
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15 नवंबर तक कचरा निस्तारण की चुनौती
नगर निगम ने हाईकोर्ट को 15 नवंबर 2026 तक डंपिंग ग्राउंड में जमा मिक्स्ड वेस्ट प्रोसेस करने का भरोसा दिया था। करीब 15 हजार टन बैकलॉग और रोजाना 80 से 90 टन नए कचरे के बीच लक्ष्य हासिल करना चुनौती है। जांच में मशीनें चालू करने, दैनिक निगरानी और तय समयसीमा के साथ कचरा निस्तारण का कार्ययोजना देने को कहा गया है।
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