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बीज लेने के लिए पानी की बौछारों में डटे रहे किसान

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अफसर नहीं सुनते बात, बीज सेंटर के नहीं बदले हालात
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सोमवार को फिर धक्का मुक्की सहकर बारिश में घंटों कतार में लगे रहे
व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं, लोग कोस रहे सरकार को
अमर उजला ब्यूरो
पिंजौर।
कृषि विभाग के अफसरों की लापरवाही कहें या अफसरशाही जिसके चलते किसानों को घंटों बीज के लिए लाइन में खडे़ होना पड़ रहा है। शर्मनाक बात तो यह है कि बीज लेने पहुंचे सीनियर सिटीजन को भी घंटों लाइन में खड़े होना पड़ रहा है। एक तरफ बीजेपी सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, वहां दूसरी ओर अभी तक ऐसा कोई तरीका विभाग ने नहीं निकाला है, जिससे बीज लेने आए किसानों को असुविधा का सामना न करना पडे़। बीज वितरण के स्थान की बात की जाए तो गंदी नाली से बदबू उठ रही है, वहीं न तो लाइट की व्यवस्था है और न ही बैठने की। बीज वितरण के दौरान कई दिन से किसान अपनी परेशानी बता रहे हैं लेकिन प्रशासन आंखें बंद करके बैठा है। गत शुक्रवार से रोज बुजुर्ग किसान अपना दुखड़ा रो रहे हैं। लेकिन अफसरों हैं कि सुनते नहीं। शुक्रवार को निर्मला, तृप्ता ने यहां की परेशानियां गिनाई थीं। लेकिन हालात नहीं बदले। सोमवार को आए देवराज सहित अन्य किसानों ने बताया कि अफसर इस बुढ़ापे में उन्हें धक्का मुक्की सहने को मजबूर कर रहे हैं। वह सोमवार सुबह से दोपहर तक का मक्की के बीज के लिए कृषि कार्यालय में घंटों लाइन में लगे रहे। पीछे लाइन में लगे किसानों को जब लगता था कि शायद कोई आगे लाइन में गलत तरीके से घुसने की कोशिश कर रहा है तो वह वहां हंगामा भी शुरू हो जाता। व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो होमगार्डों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। लेकिन वह भी मौके से गायब थे। दोपहर करीब साढे़ 11 बज रहे थे मौसम खराब होने के बाद भी किसान बारिश में कतार में लगे रहे।
किसानों ने बीज वितरण व्यवस्था पर रोष जताते हुए कहा कि दून और रायतन सहित कई किलोमीटर दूर से वह बीज लेने आ रहे हैं। उम्मीद थी कि बीजेपी सरकार में स्थिति सुधर जाएगी। लेकिन हालात तो पहले से भी खराब हो गए हैं। किसानों ने कहा कि पिंजौर शहर में एक ही कृषि कार्यालय है जहां बीज वितरित किया जाता है। उन्होंने प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई कि शहर के दून और रायतन क्षेत्र में बीज वितरण कार्यालय बनाया जाए। जब इस बारे में ज्वांइट डायरेक्टर कृषि विभाग जगराज डांडी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह प्रशासनिक मामला है। मेरा यह विभाग नहीं हैं। इस संबंध में संबधित अधिकारी मीनाक्षी दहिया से बात करें।
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मेरे पास शिकायत आई तो कार्रवाई की जाएगी : मीनाक्षी दहिया
डिप्टी डायरेक्टर एडमिन एग्रीकल्चर फार्मर वेलफेयर मीनाक्षी दहिया ने बताया कि उनके पास अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। स्थानीय एडमिनिस्ट्रेशन और पॉलिटिकल नुमांइदे आपस में कोऑर्डिनेट कर स्थिति में सुधार ला सकते हैं। अगर संबंधित शिकायत मुझ तक किसानों या एडमिनिस्ट्रेशन के माध्यम से पहुंचती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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