परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए माता-पिता ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर दुबई भेजा था, लेकिन वे आंखों में आंसू लेकर लौट आए। सर, मैं तो नौकरी के लिए दुबई गया था। ट्रैवल एजेंट ने कहा था कि वहां की एक निजी सुरक्षा कंपनी पंजाबी युवाओं को नौकरी पर रख रही है। तीन महीने ही बीते थे, घर भेजने के लिए कंपनी ने अभी पैसे भी नहीं दिए थे कि अचानक एक सुबह जब काम पर पहुंचे तो कंपनी दफ्तर में ताला लगाकर फरार हो चुकी थी। जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं थी। कई दिन तक भूखा रहना पड़ा। कई दिन रोते हुए बीते।
घर लौटने की आशा की किरण दिखाई सरबत दा भला ट्रस्ट के प्रमुख डॉ. एसपी सिंह ओबरॉय ने। उन्होंने अपने दुबई स्थित घर में हमें शरण ही नहीं दी, बल्कि वतन लाकर नया जीवन भी दिया। यह कहना था दुबई से श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लौटे पानीपत निवासी दीपक कुमार का। डॉ. ओबरॉय के साथ हवाई अड्डे पहुंचे 14 नौजवानों ने कुछ इस तरह की व्यथा बताई। दुबई की उक्त कंपनी बंद हो जाने के बाद वहां काम करने वाले 29 भारतीयों में से मंगलवार सुबह 14 नौजवान दुबई से श्री गुरु रामदास हवाई अड्डा राजासांसी पहुंचे।
इनमें से 11 नौजवान पंजाब, 2 हिमाचल और 1 हरियाणा का है। वहीं कुल 29 नौजवान में पंजाब के 18, हरियाणा के 6, हिमाचल प्रदेश के 4 और दिल्ली का एक नौजवान इस कंपनी में काम करते थे। पंजाब के 18 युवकों में से 7 सिर्फ होशियारपुर जिले के हैं।
कंपनी का मालिक पाकिस्तानी था, बिना वेतन दिए भाग गया
डॉ. ओबरॉय ने बताया कि इन युवाओं को दुबई की एक कंपनी ने सिक्योरिटी के काम के लिए भारत से दुबई बुलाया था। कुछ ही महीनों बाद कंपनी का पाकिस्तानी मालिक कंपनी बंद कर कर भाग गया। उसने इन युवकों को तीन से छह महीनों के काम की पगार भी नहीं दी। जब इन युवकों ने उनसे संपर्क करके अपनी आपबीती सुनाई तो उन्होंने इनको भारत लाने का फैसला किया। इसके लिए जरूरी कागजात पूरे करने के अलावा दुबई से भारत की हवाई टिकटों, जुर्माना, ओवरस्टे का खर्चा भी उन्होंने उठाया। 10 नौजवान, जिनके कागजात मुकम्मल थे, उनको पहले ही उनके घरों में पहुंचा दिया गया है। आज 14 और नौजवान भारत पहुंच गए हैं। बाकी पांच युवकों को भी जल्द ही कागज पूरे कर वापस लाया जाएगा।
इन्होंने की वतन वापसी
मंगलवार को वतन लौटे युवकों में पंजाब के होशियारपुर के वरुण, मनदीप सिंह, प्रवीण कुमार, अमनदीप सिंह निवासी चब्बेवाल, अमनदीप निवासी चब्बेवाल, मनप्रीत सिंह और विशाल शर्मा निवासी गढ़शंकर, बलविंदर कुमार निवासी कपूरथला, नीतीश चन्दला निवासी पटियाला, राज किशोर भार्गव निवासी फगवाड़ा, भवनप्रीत सिंह निवासी खरड़, दीपक कुमार निवासी पानीपत (हरियाणा), विकरन जोशी निवासी (हिमाचल प्रदेश) और गोपाल निवासी (हिमाचल प्रदेश) शामिल हैं।
मस्कट में फंसी बेटियों को भी घर लाऊंगा...
डॉ. ओबरॉय ने बताया कि जब तक बाकी पांच युवक वतन नहीं लौटते, तब तक दुबई स्थित उनके घर में उनके खाने और रहने का इंतजाम होगा। उन्होंने युवकों को नसीहत दी कि वह एजेंटों की तरफ से बताई गई कंपनी की अच्छी तरह जांच करने के बाद ही अरब देशों में नौकरी के लिए जाएं। मस्कट में फंसी सभी लड़कियों को बचाने के लिए वह हर कीमत देने के लिए तैयार हैं, लेकिन भारत सरकार का विदेश मंत्रालय भी उनकी मदद के लिए आगे आए।