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हिसार में कोरोना से हाहाकार: 11 गांवों में करीब 20 दिन में 138 की मौत, खांसी-बुखार पीड़ित तोड़ रहे दम

सुरेंद्र दलाल, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा) Updated Sun, 09 May 2021 04:11 AM IST

सार

हिसार जिले में कुल 303 गांव हैं। करीब 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रह रही है। इस समय कोरोना के सैंपल केवल शहरों या उपमंडल स्तर के अस्पतालों में चुनिंदा स्थानों पर ही लेने की सुविधा है।
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हिसार के तलवंडी राणा गांव में जांच करते स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार, खांसी, जुकाम के बाद दम तोड़ रहे लोगों ने चिंता में डाल दिया है। हरियाणा के हिसार जिले में रोजाना औसतन 50 से 60 लोगों मौत हो रही है। वहीं हिसार के 11 गांवों में पिछले 20 दिन में 138 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी मौतों के बाद सैंपल भी नहीं लिए जा रहे। ऐसे में महामारी के और फैलने का खतरा है। 


हिसार जिले में कुल 303 गांव हैं। करीब 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रह रही है। इस समय कोरोना के सैंपल केवल शहरों या उपमंडल स्तर के अस्पतालों में चुनिंदा स्थानों पर ही लेने की सुविधा है। गांव में किसी को बुखार, खांसी, जुकाम सहित अन्य लक्षण होने पर लोग बड़े अस्पताल नहीं पहुंचते। ऐसे लोग गांव के ही किसी चिकित्सक या केमिस्ट से दवा लेते हैं।  


मरीज की हालत बिगड़ने पर गांव के लोग बड़े अस्पताल जाने के बजाय अपने स्तर पर ही सिलिंडर की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं। गांव में किसी की कोरोना संदिग्ध मौत होने पर परिजन भी जांच के लिए आगे नहीं आते। शव की भी कोरोना जांच कराने के बजाय अंतिम संस्कार करा देते हैं।

ग्रामीणों में इस बात का डर
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में सबसे अधिक डर इस बात का है कि पॉजिटिव मिलने पर उनके मरीज को चिकित्सक घर नहीं जाने देंगे। इसके बाद आइसोलेशन वार्ड में न तो मरीज से मिलने दिया जाएगा और न ही मरने के बाद उनको शव मिलेगा। इन कारणों के चलते ज्यादातर लोग संदिग्ध मरीजों की जांच नहीं करवा रहे हैं। 
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जिले में कहां कितनी मौत

  • शाहपुर गांव में 10 दिन में 18 की मौत
  • बहबलपुर में 10 दिन में 12 की मौत
  • खांडा खेड़ी में 8 दिन में 16 की मौत
  • सिसाय गांव में 10 दिन में 11 की मौत
  • बालसमंद 10 दिन में 9 की मौत
  • बुड़ाक गांव में 7 दिन में 5 की मौत
  • गढ़ी गांव में 6 दिन में 9 की मौत
  • तलवंडी राणा गांव में 7 दिन में 10 की मौत
  • खरड़ गांव में 15 दिन में 18 की मौत
  • तलवंडी बादशाहपुर 20 दिन में 15 की मौत
  • प्रभुवाला गांव में 14 दिन में 15 की मौत
सिसाय में बहुत कम लोग जांच के लिए पहुंच रहे हैं। जिस मरीज की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ जाती है, उस मरीज तक पांच दिन भी दवाई नहीं पहुंचती। घर में क्वारंटीन मरीजों की कोई सुध नहीं ले रहा। मरीज हांसी और हिसार के निजी अस्पतालों में दाखिल होने को मजबूर हो रहे हैं। - विनोद रोहिल्ला, पूर्व महासचिव सिसाय वेलफेयर एसोसिएशन। 
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मैंने अपने जीवन में इस तरह से मौत नहीं देखी। एक दिन में तीन-तीन अर्थी गांव से उठ रही हैं। बुखार, वायरल के मरीज हर घर में हैं। बुजुर्ग नहीं 30-32 साल के लड़के भी दम तोड़ रहे हैं। गांव के लोग जांच के लिए शहर नहीं जा रहे। गांव में जांच के लिए कोई सुविधा नहीं है। - भजनलाल, सरपंच प्रतिनिधि, बहबलपुर।

गांव में जांच, दवाइयों की कोई सुविधा नहीं है। सात दिन में 10 लोगों की मौत के बाद मैंने अपने स्तर पर कुछ लोगों के सहयोग से कैंप का आयोजन कराया। कोविड-19 टेस्ट की कोई सुविधा नहीं है। गांव में हो रही मौत संदिग्ध हैं। प्रशासन गांव में विशेष जांच अभियान चलाए। - ओपी कोहली, सरपंच प्रतिनिधि, तलवंडी राणा।

गांव में बुखार के कुछ मरीजों की मौत हो चुकी है। गांव में लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों को मास्क, सैनिटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग के लिए भी अनुरोध कर रहे हैं। - सुनील कुमार, सरपंच, गांव गढ़ी।

खरड़-अलीपुर में पिछले 15 दिन में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। चार लोग कोरोना से पीड़ित होकर अस्पतालों में भर्ती थे। कुछ लोगों की बुखार के कारण मौत हुई है। गांव में स्वास्थ्य सेवाएं लचर हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात चिकित्सक की ड्यूटी दूसरी जगह लगाई गई है। - सुनील कुमार, सरपंच, खरड़। 

सभी उपमंडलाधीश को ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग के लिए तैयारी कर रहे हैं। गांवों में सार्वजनिक स्थानों, धर्मशालाओं, सरकारी स्कूलों और आयुष केंद्रों को आइसोलेशन केंद्रों के रूप में स्थापित कर हल्के लक्षण वाले संक्रमितों का उपचार करने की व्यवस्था की जाएगी। विशेष कैंप लगाए जाएंगे। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। - डॉ. प्रियंका सोनी, उपायुक्त हिसार।
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