डॉ. राजवंत कौर राजिंदरा के कोविड वार्ड में मरीजों के खाने-पीने से लेकर उनकी हर तरह की समस्या का खुद ध्यान रख रही हैं। उन्होंने माना कि गरमी में पीपीई किट पहनने से मुश्किल होती है लेकिन मरीजों के दर्द के आगे यह कुछ भी नहीं है। डॉ. राजवंत ने कहा कि मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज होते हैं तो डॉक्टरों व बाकी स्टाफ के चेहरे पर खुशी आ जाती है।
उन्होंने कहा कि उनके छह साल और तीन साल के दो बेटे हैं। रात को अक्सर घर पहुंचने में 10 बज जाते हैं। पति पूरी तरह से सपोर्ट कर रहे हैं। लेकिन बच्चे शिकायत करते हैं। खास तौर से छोटा बेटा उनके बगैर खाना सही तरह से नहीं खा रहा है।
राजिंदरा में कोविड मरीजों की देखरेख में लगी स्टाफ नर्स अकविंदर कौर ने बताया कि शिफ्ट वाइज तीन-तीन घंटे पीपीई किट पहन कर उन्हें कोविड मरीजों की देखरेख करनी पड़ती है। इस दौरान बाथरूम जाने या फिर कुछ भी खाने में दिक्कत होती है। कई बार पीपीई किट से त्वचा पर रैश भी पड़ जाते हैं। साथ ही बताया कि वह पिछले 15 दिनों से अपने दो साल के बेटे से नहीं मिल पाई। संक्रमण के डर से बेटे को अपनी मम्मी के घर छोड़ रखा है। साप्ताहिक अवकाश पर ही बेटे को देखने जाती हूं। अकविंदर ने कहा कि बस अब उम्मीद है कि यह महामारी जल्द खत्म हो।
एक अन्य स्टाफ नर्स जश्नप्रीत कौर ने बताया कि वह अपनी डेढ़ साल की बेटी को छोड़कर ड्यूटी दे रही हैं। तीन-तीन घंटे पीपीई किट पहनने से मुश्किल तो होती है लेकिन संतुष्टि है कि वह मरीजों की सेवा कर रही हैं। घर में बुजुर्ग माता-पिता को भी उन पर गर्व है।
थाना इंचार्ज कर रही हैं गरीबों की मदद
थाना सब्जी मंडी की इंचार्ज प्रियांशु सिंह एक तरफ कोरोना वॉरियर के रूप में जहां लोगों को इस महामारी के प्रति जागरूक कर रही हैं, वहीं गरीबों की मदद भी कर रही हैं। कोरोना की पहली लहर में भी प्रियांशु सिंह ने लॉकडाउन के दौरान गरीब लोगों की काफी मदद की थी। खास तौर से उन्होंने गरीब लड़कियों को सेनेटरी पैड उपलब्ध कराए थे। इस बार कोरोना की दूसरी लहर में भी वह गरीबों की मदद के लिए आगे आ रही हैं। प्रियांशु सिंह ने बताया कि जो लोग लापरवाही करते हुए कोविड गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्ती बरतने में भी वह पीछे नहीं हट रही हैं।
गरीब बच्चों की आर्थिक मदद कर रही हैं शिक्षिका पूनम गुप्ता
सरकारी मिडल स्कूल खेड़ी गुजरां हेड डॉ. पूनम गुप्ता इस कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी हर तरह से मदद भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के पास मोबाइल रिचार्ज कराने को पैसे नहीं होते हैं, उन्हें पैसे देकर मदद की जाती है। जबकि कोरोना कारण घरों में पैसों की तंगी के चलते जो बच्चे डिप्रेशन में चले गए हैं, उनकी मदद के साथ-साथ काउंसलिंग करके उनकी मानसिक हालत में सुधार लाने की कोशिश में जुटी हैं। मिड डे मील के लिए आए राशन के सामान को गरीब बच्चों के घरों में पैकेट बनाकर पहुंचाया जा रहा है, क्योंकि कोरोना के कारण इन दिनों स्कूल बंद हैं।