दाल रोटी योजना के तहत गरीबों में बांटने के लिए आई दाल योजना को बंद कर देने से प्रदेश के गोदामों में खराब हो गई। यह दाल अगस्त 2017 में सभी जिलों में भेजी गई थी, लेकिन उस माह पूरी दाल नहीं बंट सकी।
इस बीच सरकार ने योजना को ही बंद कर दिया। इससे करीब 2.67 करोड़ रुपये की 13.36 लाख किलो दाल गोदामों में रखे-रखे खराब हो गई। एक किलो की पैकिंग में साबुत मसूर की दाल के पैकेट पर साफ लिखा है कि जुलाई 2017 में दाल को पैक किया गया है और यह केवल तीन महीने के लिए बेहतर है। इस तरह खाने के लिहाज से यह दाल अब उपयुक्त नहीं रह गई है।
बता दें कि कांग्रेस सरकार के समय 2013 में सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गरीबों को कम दाम में दाल उपलब्ध कराने के लिए दाल रोटी योजना को शुरू किया था। इसमें अंत्योदय कार्ड धारकों के साथ ही गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को एक कार्ड पर दो किलो दाल दी जाती थी। इसके तहत ही अगस्त 2017 में प्रदेश भर में साबुत मसूर की दाल के पैकेट भेजे गए, जिनको 20 रुपये प्रति किलो बांटा जाना था। उस समय 48 लाख 17 हजार किलो दाल बांटने के लिए भेजी गई, लेकिन उसमें से 34 लाख 81 हजार किलो दाल बंट सकी और 13 लाख 36 हजार किलो दाल गोदामों में रह गई। सबसे ज्यादा दाल भिवानी में और सबसे कम दाल पंचकूला में पड़ी है।
भाजपा सरकार का हाजमा तेज है, जो घपले करके खुद खूब खा रही है और आम जनता को उनके हक की चीजें नहीं दी जा रही हैं। अगर गोदाम में खराब करने की जगह लोगों को दाल बांट दी जाती तो उनको कम से कम दाल खाने के लिए नसीब हो जाती। अब तो यह दाल खाने के लिए भी ठीक नहीं है। सरकार के कारण बड़ा नुकसान हुआ है।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम