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अमर उजाला इंपैक्ट: पर्ल ग्रुप के एमडी सुखदेव सिंह के किसानी कर्ज माफी पर लगी रोक

Sat, 13 Jan 2018 09:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोपड़(पंजाब)
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Pearl Group - फोटो : File Photo
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करोड़ों रुपये के चिट फंड और अन्य घपलों के मामले में फसें पर्ल ग्रुप के एमडी सुखदेव सिंह का किसानी कर्ज माफ होने पर अब रोक लग गई है। गौरतलब है कि कोऑपरेटिव सोसाइटी गांव झलियां की ओर से पर्ल ग्रुप की कंपनी पीएसीएल के मैनेजिंग व प्रमोटर डायरेक्टर सुखदेव सिंह का पौने दो लाख रुपये का कर्ज माफ किया जा रहा था।
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कर्ज माफी वाली सूची में सुखदेव सिंह का नाम गांव झलियां की कोआपरेटिव सोसाइटी में 26 वें नंबर पर शामिल किया गया। सारा मामला अमर उजाला ने उठाया तो स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं पर चंडीगढ़ के अधिकारियों के दफ्तरों में भी फोन की घंटियां बज रही हैं। जो अधिकारी कल तक मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे थे। उनका कहना है कि उन्होंने तो सुखदेव सिंह की गांव झलियां में स्थित जमीन का रिकॉर्ड देखकर नाम कर्ज माफी वाली सूची में डाला।

सारे मामले को अमर उजाला की ओर से प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अब कोआपरेटिव सोसाइटी ने एसडीएम के जरिये सुखदेव सिंह के कर्ज माफी पर रोक लगा दी। इसकी पुष्टी कोआपरेटिव सोसाइटी के डिप्टी रजिस्ट्रार राजबीर सिंह संधू ने की। उन्होंने बताया कि पहले पता नहीं था कि सुखदेव सिंह पर्ल ग्रुप से संबंधित हैं। बता दें कि पर्ल ग्रुप के चेयरमैन निर्मल सिंह भंगू इसी कंपनी के एमडी सुखदेव सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं। पर्ल ग्रुप के एमडी सुखदेव सिंह और चेयरमैन निर्मल सिंह भंगू दोनों ही फिलहाल धोखाधड़ी के मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। ईडी ने पर्ल ग्रुप की ऑस्ट्रेलिया में स्थित सैकड़ों एकड़ जमीन पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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रिकॉर्ड से नाम निकालना बना मुसीबत

Captain Amarinder's Farmer rally in Mansa - फोटो : File Photo
बाकी जमीन का रिकार्ड खंगालने के आदेश 
कोआपरेटिव सोसाइटी के डिप्टी रजिस्ट्रार राजबीर सिंह संधू ने मामले में कार्रवाई करते हुए सुखदेव सिंह के कर्ज माफी पर रोक लगा दी है। वहीं पर विभाग को सुखदेव सिंह की बाकी जमीन का रिकार्ड खंगालने के आदेश जारी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सुखदेव सिंह की गांव
झलियां में तो रिकॉर्ड के अनुसार लगभग ढाई एकड़ जमीन है। लेकिन उसकी कहां कहां और जमीन है, इसका रिकार्ड उनके पास नहीं है। रिकार्ड को खंगालने के लिए माल विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। 

रिकॉर्ड से नाम निकालना बना मुसीबत
गौरतलब है कि अमर उजाला में यह मामला उठाए जाने के बाद अब गांव झलियां में कोआपरेटिव सोसाइटी में हड़कंप मचा है। कई अधिकारी गांव झलियां में दौरा कर जांच के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं कई उच्च अधिकारी फोन पर ही कोआपरेटिव बैंक के मैनेजर से इसकी पुष्टी मांग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उच्च अधिकारी निचले स्तर के अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं कि किसी तरह सुखदेव सिंह का नाम इस सूची से बाहर कर मामले को शांत किया जाए। लेकिन निचले स्तर के अधिकारियों का कहना है कि गांव में स्थित जमीन के रिकॉर्ड पर बनाई गई सूची में अब कैसे उसका नाम निकाला जा सकता है। इसलिए अधिकारी चिंता में हैं।

दोबारा सूची बनाकर भेजी जा रही है
गांव झलियां की कोआपरेटिव सोसाइटी के सेक्रेटरी हरमन सिंह का कहना है कि उन्होंने जमीन का रिकॉर्ड देखकर ही सूची में सुखदेव सिंह का नाम शामिल किया था। लेकिन जब पूछा कि क्या आप नहीं जानते कि सुखदेव सिंह कौन हैं। इस पर सेक्रेटरी हरमन सिंह ने कहा कि उन्हें पता तो था। लेकिन रिकार्ड के अनुसार सुखदेव सिंह का नाम डाला गया था। उधर, बैंक मैनेजर खुशविंदर सिंह ने कहा कि सुखदेव सिंह की दो एकड़ से भी कम जमीन है। अधिकारियों के निर्देश पर जांच कर दोबारा सूची बनाकर भेजी जा रही है। गौरतलब है कि माल विभाग के पटवारी अब सुखदेव सिंह की जमीन का रिकॉर्ड खंगालने में जुट गए हैं।

हमने एसडीएम के माध्यम से सुखदेव सिंह के किसानी कर्ज माफी पर रोक लगा दी है। साथ ही राजस्व विभाग को सुखदेव सिंह की अन्य जमीन का रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया है। -राजबीर सिंह संधू, कोआपरेटिव सोसाइटी के डिप्टी रजिस्ट्रार।
 
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