अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले एक बुरी खबर आई है। दरअसल, यात्रा के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है और इसकी वजह जानकर सभी स्तब्ध हैं। एक जुलाई से शुरू होने जा रही श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु लंगर में स्वादिष्ट व पौष्टिक पकवान का स्वाद नहीं ले सकेंगे।
देश भर की तकरीबन 114 भंडारा कमेटियों ने लंगर नहीं लगाने का फैसला किया है। इसकी वजह भंडारा लगाने की समयावधि नहीं बढ़ाने के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड का अड़ियल रवैया है। कमेटियों का कहना है कि श्राइन बोर्ड ने लंगर लगाने की जो समयावधि घोषित की है, वह बहुत कम है।
इतने कम समय में ऊंचाई वाले स्थानों पर लंगर लगाना मुश्किल है। समयावधि बढ़ाने की मांग नकार दी गई, इसीलिए भंडारा कमेटियों की संस्था श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन ने अमरनाथ यात्रा का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
श्रद्धालु राजिंदर कुमार, रमेश कुमार, गणेश सैनी, राजेश पुरी व जसवंत ने कहा कि भंडारे नहीं लगे तो यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ेगी। भंडारे वालों की मदद से ही श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पूरी कर पाते हैं। भंडारे वाले मुफ्त में श्रद्धालुओं के खानपान के अलावा मेडिकल सुविधा और रात को सोने की व्यवस्था करते हैं। यात्रा के समय टेंट वाले एक रात का एक श्रद्धालु से पांच सौ से एक हजार रुपये वसूलते हैं।
जब कभी बर्फ या बारिश पड़ने लगती है तो यही टेंट वाले प्रति व्यक्ति दो से तीन हजार रुपये एक रात का वसूल करते हैं। पहलगाम और बालटाल के रास्ते यात्रा शुरू करने पर रास्ते में मिनरल वाटर या फिर कोल्ड ड्रिंक कश्मीरी लोगों से लेनी पड़ती है तो 50 से 70 रुपये बोतल के हिसाब से बेचते हैं, जबकि उनकी कीमत पंद्रह रुपये होती है। भंडारा कमेटियां श्रद्धालुओं के लिए मिनरल वाटर व कोल्ड ड्रिंक तक का बंदोबस्त करती हैं।
पिछले दस साल से अमरनाथ यात्रा पर जा रहे शिवभक्त संदीप कुमार व अमनदीप ने कहा कि भंडारे नहीं लगे तो अमरनाथ यात्रा पर श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम हो जाएगी। क्योंकि किसी भी श्रद्धालु को कोई दिक्कत या परेशानी आती है तो भंडारा कमेटियां ही उनकी मदद करती हैं।
अमनदीप ने बताया कि दो साल पहले उनके रिश्तेदार की बालटाल में मौत हो गई थी, वहां से पंजाब के मुक्तसर तक पहुंचाने के लिए कश्मीरी साठ हजार रुपये मांग कर रहे थे। जब हमने भंडारा कमेटी चंडीगढ़ से मदद मांगी तो उन्होंने बिना पैसे लिए मुफ्त में मुक्तसर तक शव पहुंचाया और रास्ते में मृतक के रिश्तेदारों को खुद अपने पास से भोजन करवाया।
शिवभक्तों ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से मांग की है कि भंडारा कमेटियों की समयावधि बढ़ाई जाए, ताकि जिन जगहों पर लंगर लगने हैं, वहां समय पर जाकर लंगर की व्यवस्था कर सकें।
यह है मामला
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड एक जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा पर लंगर लगाने के लिए भंडारा कमेटियों को आदेश दिए हैं कि 21 जून से पहले जम्मू-कश्मीर में प्रवेश न करें। 21 जून के बाद ही जम्मू-कश्मीर में दाखिल हों और 27 जून तक निश्चित की गई जगहों पर लंगर लगाएं।
श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के महासचिव राजन गुप्ता का कहना है कि इतने कम समय में लंगर लगाना संभव नहीं है। ऊंचाई वाली जगहों पर भंडारा सामग्री पहुंचानी बहुत मुश्किल है, इसके लिए उन्हें खुला समय चाहिए।