इंटरनेशनल बॉर्डर अटारी सीमा पर स्थित इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के जरिये दिल्ली का एक व्यापारी भारत में प्रतिबंधित शाहतूस से बनी 100 शॉल की खेप पाकिस्तान भेजते हुए पकड़ा गया। दिल्ली का व्यापारी पाकिस्तान जाने वाले एक व्यक्ति से इस खेप को पाकिस्तान भेजने का प्रयास कर रहा था। आईसीपी में तैनात कस्टम विभाग के अधिकारियों ने इस खेप को जब्त कर व्यक्ति को हिरासत में लिया। बाद में पूछताछ के बाद उसे जमानत पर छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार पाकिस्तान भेजी जा रही यह शॉल तिब्बत में पाए जाने वाले हिरन की खाल शाहतूस से बनी हो सकती है। कस्टम के अधिकारियों ने शॉल के सैंपल देहरादून स्थित लैब में भेजे हैं। जमानत में छोड़े गए व्यक्ति ने कस्टम विभाग को बताया की ये शॉल शाहतूस की नहीं, बल्कि पशमीना की हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ये शॉल शाहतूस की बनी हो सकती है। इनके सैंपल लेकर देहरादून स्थित लैबोरेटरी में भेजे हैं, ताकि इसकी स्पष्ट जानकारी मिल सके।
सूत्रों के अनुसार 1975 से शाहतूस की शॉल भारत में प्रतिबंधित है, क्योंकि इस शॉल को बनाने के लिए हिमालयन रेंज के अति दुर्लभ वन्य जीव प्राणी तिब्बतन ऐंटीलोब चीरू को मारना पड़ता है। चीरू तिब्बत में पाए जाने वाले हिरन की प्रजाति है। इनके रेशेदार बाल इनके शरीर को ढककर सर्दी से बचाते हैं। एक शॉल को बनाने के लिए चार से पांच चीरू मारने पड़ते हैं। वन्य जीव प्राणी चीरू तिब्बत के दुर्गम पठार इलाकों और लद्दाख में माइनस 40 डिग्री के तापमान के इलाके में रहता है और बहुत कम दिखाई देता है।