वेतन न मिलने के विरोध में दो दिन से 108 एंबुलेंस के हड़ताल पर चल रहे जिले में करीब 100 कर्मचारियों को शनिवार बाद दोपहर सेहत विभाग ने नौकरी से निकालते हुए गाड़ियों की चाबियां वापस ले लीं। उनकी जगह नए भरती स्टाफ के हवाले गाड़ियां कर दी गईं।
इस मौके पर सिविल सर्जन डा. एचएस बाली, डीएसपी केसर सिंह और चिकित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड मुंबई के जिला इंचार्ज दलजीत सिंह मौजूद रहे। दलजीत सिंह ने हड़तालियों को नौकरी से निकालने की पुष्टि की।
108 एंबुलेंस स्टाफ के जिला प्रधान हरदीप सिंह ने बताया कि पटियाला जिले में ये 16 एंबुलेंस हैं। इनके लिए करीब 100 ड्राइवर और इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन (ईएमटी) रखे हैं। पिछले दो महीने से सारे स्टाफ को सैलरियां नहीं मिल रही हैं और ऊपर से ओवरटाइम में काम कराने के बावजूद कोई पैसा नहीं दिया गया।
इसके रोष स्वरूप स्टाफ वीरवार से हड़ताल पर चल रहा है। शनिवार बाद दोपहर करीब तीन बजे सिविल सर्जन डा. एचएस बाली, डीएसपी केसर सिंह और कंपनी के जिला इंचार्ज दलजीत सिंह समेत राजिंदरा अस्पताल में पहुंचे और वहां मौजूद हड़ताली स्टाफ से एंबुलेंस की चाबियां मांगी।
हड़तालियों ने चार्ज लिखित में लेने की शर्त पर ही चाबियां देने को कहा। बाद में हड़तालियों के कहे मुताबिक लिखित में चार्ज लेकर उनसे चाबियां लेकर नए रखे स्टाफ को सौंप दी गईं। हम विभाग की इस ज्यादती को नहीं सहेंगे और मोहाली में डायरेक्टर नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के दफ्तर के आगे पंजाब स्तरीय धरना दिया जाएगा।
वापस नहीं रखा जाएगा स्टाफ
जिला इंचार्ज दलजीत सिंह ने इस मौके पर पुष्टि की कि सभी 100 हड़तालियों जिनमें ड्राइवर और ईएमटी हैं, उन्हें निकाल दिया गया है। उनकी जगह नए स्टाफ को रखा गया है। अब अगर हड़ताली वापस नौकरी पर आना भी चाहेंगे, तो नहीं आ सकेंगे। फिलहाल केवल ड्राइवर रखे हैं, जल्द ही ईएमटी की भी भरती की जाएगी।
कुछ दिन थानों में खड़ा करेंगी एंबुलेंस
जिला इंचार्ज दलजीत सिंह ने कहा कि फिलहाल जब तक यह मामला ठंडा नहीं पड़ता है, सुरक्षा के लिहाज से सभी 16 एंबुलेंस को संबंधित थानों में खड़ा किया जाएगा ताकि निकाला स्टाफ गाड़ियों की तोडफोड़ न कर सके।
अनट्रेंड स्टाफ को नौकरी पर रखने का आरोप
उधर हड़तालियों ने सेहत विभाग और चिकित्सा हेल्थ केयर कंपनी पर अनट्रेंड स्टाफ को नौकरी पर रखने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एंबुलेंसों के लिए केवल ड्राइवर रखे गए हैं, जबकि ईएमटी ही मरीजों को प्राथमिक चिकित्सा देता है। उसे ही पता होता है कि मरीजों को कैसे अस्पताल तक लाना है। ऊपर से नए भरती ड्राइवरों में से ज्यादातर के पास लाइसेंस ही नहीं हैं।