रावी नदी के तट पर बसे गुरदासपुर और अमृतसर के कई गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को दरिया पार करने के लिए आज भी नाव का सहारा लेना पड़ता है। सरकारें दरिया पर पुल का निर्माण नहीं कर सकी है। देश की पहली डिफेंस ड्रेन के ऊपर बने तंग पुलों को चौड़ा करने का काम भी शुरू नहीं किया गया। बॉर्डर एरिया के लोगों के लिए पीने के स्वच्छ पानी की बड़ी समस्या है। 2007 में केंद्रीय सरकार के वफद ने बॉर्डर एरिया में पीने के पानी की स्थिति जायजा लिया था लेकिन इस वफद की रिपोर्ट पर आज तक अमल नहीं हुआ।
बादल ने गठित किया था बॉर्डर विकास बोर्ड
तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बॉर्डर जिलों के विकास के लिए 1997 में बॉर्डर विकास बोर्ड का गठन किया था। बादल सरकार ने कंटीले तार के उस पार के जमीन मालिक किसानों को केंद्र के सहयोग से तीन हजार प्रति एकड़ का मुआवजा देना शुरू किया था। बादल सरकार के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस सुविधा को खत्म कर दिया था।
सीमावर्ती किसानों की सबसे बड़ी समस्या कंटीले तार के उस पार खेती के लिए जाना है। बीएसएफ ने इसके लिए कुछ घंटे निर्धारित किए हुए हैं। इसको लेकर सीमावर्ती किसानों ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किए। बॉर्डर एरिया के लोगों की एक अन्य समस्या यह भी है कि ट्रांसपोर्ट के साधन कम होने के कारण लोगों को आने-जाने में कठिनाई आती है।