राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की गोल्ड मेडलिस्ट दस वर्षीय रिद्धि नवंबर 2015 को बैंकॉक में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। प्रशासन की बेरुखी ने देश की इस होनहार बेटी के भविष्य को ही नहीं सपनों को भी चकनाचूर कर दिया है।
असहाय पिता ने अब दानवीर कर्ण की नगरी के बाशिंदों से सहायता की गुहार लगाई है। रिद्धि के पिता हांसी चौक वासी मनोज फोर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। गरीबी के कारण वे अपनी बेटी को अभ्यास के लिए महंगी किट नहीं दिला सकते।
सहायता के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, खेलमंत्री अनिल विज और डीसी करनाल डॉ. जे गणेशन से गुहार लगाई गई पर इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला। प्रशासनिक अधिकारियों ने महीनों चक्कर कटवाने के बाद भी उनकी कोई मद्द नहीं की। प्रशासन ने बेटी को तीर देने की बजाय उसकी आंखों में नीर जरूर दे दिए।
अब वे थक-हारकर मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे। उन्होंने गरीब परिवार को मद्द का आश्वासन दिया है। बेटी को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता के लिए तैयारी करनी है, जिसके लिए उन्हें रिकर्व धनुष (कार्बन निर्मित धनुष बाण) की जरूरत है।
डीसी से मिले तीन बार आश्वासन
वे डीसी करनाल से तीन जनवरी 2015 को मिले, जिस पर उन्होंने आश्वासन दिया था कि 26 जनवरी 2015 को हरियाणा के राज्यपाल द्वारा बेटी को सम्मान के रूप में यह किट जिला ओलंपिक एसोसिएशन के अकाउंट से दी जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ। 10 मार्च 2015 को उन्होंने यह कहकर मनाकर दिया कि इस विषय में मद्द नहीं कर सकते और आप अपने स्तर पर ही किट मंगवाएं।
लकड़ी के धनुष पर किया अभ्यास
आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में 15 से 24 सितंबर 2014 तक हुई सातवीं राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के अंडर-14 वर्ग में रिद्धि ने गोल्ड मेडल जीता। रिद्धि ने इतने कम संसाधनों के बावजूद इतनी कम उम्र में उपलब्धि हासिल की। वर्ष 2014 में ही फरीदाबाद में आयोजित हुई स्कूल स्टेट तीरंदाजी प्रतियोगिता में भी गोल्ड हासिल किया। रिद्धि ने यह मुकाम हासिल करने के लिए लकड़ी के धनुष पर अभ्यास किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने के लिए रिद्धि को रिकर्व धनुष (कार्बन निर्मित धनुष बाण) की जरूरत है।
रिद्धि के पिता मेरे पास आए हैं। उसे रिकर्व धनुष (कार्बन निर्मित धनुष बाण) जरूर दिलाया जाएगा, ताकि वह अभ्यास कर सके। जल्द ही उसे सारा सामान दिलाएंगे।
- अमरेंद्र सिंह, ओएसडी मुख्यमंत्री, करनाल।