पेयजल एवं सेनिटेशन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा
सरपंच और पंच को दसवीं पास होना जरूरी होने वाला है। यानी अब आपकी पंचायतों के सरपंच पढ़े लिखे होंगे। पंजाब सरकार ने पड़ोसी राज्य हरियाणा की तर्ज पर सूबे में पंचायती नुमाइंदों के चुनाव में शिक्षा को महत्व देने का फैसला किया है। पंजाब के गांवों में भी अब पंच व सरपंच पढ़-लिखे होंगे। राज्य मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है। यह कहना है पंजाब के पंचायत, पेयजल एवं सेनिटेशन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का।
उन्होंने कहा कि पंचों और सरपंचों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तय करने पर विचार किया जा रहा है। वे स्वयं भी पंचायती नुमाइंदों की शैक्षिक योग्यता तय करने के पक्षधर हैं। पढ़े-लिखे नुमाइंदे अपने गांवों के विकास में पूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और गांवों को मिलने वाली ग्रांट का सही ढंग से इस्तेमाल कर ग्रामीणों की मदद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक 20 अप्रैल को होने की संभावना है। उम्मीद है कि उस बैठक में इस मुद्दे पर भी सरकार कोई फैसला लेगी। सोमवार को पंजाब सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाजवा ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान सूबे की पंचायतों का जो हाल हो गया है, उसमें यह भी देखने में आया है कि पंचायत सचिव व अन्य अधिकारी पंचों-सरपंचों के अनपढ़ होने का फायदा उठाते रहे हैं।
अनपढ़ पंचों-सरपंचों से अधिकारी किसी भी कागज में साइन करवा लेते हैं और इससे पंचायत को मिली ग्रांट में हेराफेरी होती है। बाद में इसका दोष पंच-सरपंच के सिर आ जाता है।