हरियाणा के दस जिलों में हुए 10,000 करोड़ के वैट घोटाले में सीबीआई ने सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया। सीबीआई ने कहा कि ऐसे घोटाले की जांच में राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है, फिर भी हाईकोर्ट आदेश दे तो सीबीआई जांच कर सकती है। इसके साथ ही सीबीआई ने जांच के लिए कार्यालय, वाहन, स्टाफ जैसी आवश्यक सुविधाओं की भी हाईकोर्ट से मांग की।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से वैट घोटाले से जुड़ा सारा रिकार्ड सील करने को कहा था। याचिकाकर्ता ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है, जिस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले में कहा गया है कि एसआईटी लोकायुक्त ने भी यह आरोप लगाया है कि मौजूदा अतिरिक्त मुख्य सचिव घोटाले की जांच का काम केवल एक जिले तक सीमित कर जांच में रुकावट पैदा कर रहे हैं।
इस बीच, सोमवार को दाखिल जवाब में कहा गया कि जांच का दायरा घटाने का फैसला मौजूदा सीएम की अनुमति से लिया गया है। जवाब में यह भी कहा गया कि डिफाल्टर व्यापारियों से 2000 करोड़ रुपये से अधिक उगाहे गए हैं।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा में वर्ष 2004 से चर्चित वैट घोटाले की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष रूप से गठित कमेटी ने की थी। इस जांच में 10,000 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ था।
इसमें कई बड़े व्यापारियों और बिल्डरों के शामिल होने के संकेत मिले थे, लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो राजस्थान और हरियाणा के दो लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई और ईडी से जांच करवाने के साथ-साथ घोटाले में शामिल लोगों के नाम सार्वजानिक करने की मांग की।