वैट पर दोहरी नीति अपनाने पर चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है। लोगों में रोष पनप रहा है। प्रशासन ने पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर वैट शनिवार से कुछ वस्तुओं के रेट बढ़ाया है। लेकिन शहर में अभी भी कई वस्तुएं ऐसी हैं जो पंजाब-हरियाणा में या तो वैट मुक्त है या फिर वहां नॉर्मल वैट लगा है। लेकिन शहर में पूरा वैट वसूला जा रहा है।
शहर के व्यापारी प्रशासन से कई बार ऐसी वस्तुओं का वैट कम या वैट मुक्त करने की मांग कर चुके हैं। इस ओर प्रशासन कदम नहीं उठा रहा है। ऐसी वस्तुओं मे वैट में अंतर होने से ट्राइसिटी में इसका प्रभाव पड़ रहा है। बता दें कि शनिवार से पेट्रोल, चावल, जीरी, कनक, पैडी और ऑटो मोबाइल पर प्रशासन ने वैट बढ़ा दिया है। व्यापारियों का कहना है कि जिन वस्तुओं पर वैट कम होना चाहिए उन पर प्रशासन का ध्यान नहीं है।
जानिए किन वस्तुओं पर जारी है प्रशासन की मनमानी
शहर में सूखे नारियल पर 5 प्रतिशत वैट चार्ज किया जा रहा है। जबकि पंजाब-हरियाणा में इस पर कोई वैट लागू नहीं है। खिलौनों पर पंजाब की तर्ज पर 5 प्रतिशत वैट है। लेकिन हरियाणा में खिलौने पर कोई वैट लागू नहीं है। इसी तरह से बच्चों की कॉपियों पर हरियाणा में कोई वैट नहीं है। लेकिन शहर में 5 प्रतिशत वसूला जा रहा है।
500 रुपये की चपल पर शहर में साढ़े 12 प्रतिशत वैट लिया जा रहा है। जबकि पंजाब में यह 5 प्रतिशत है और हरियाणा में इस पर कोई वैट नहीं है। ड्राई फ्रूट पर शहर में 5 प्रतिशत वैट है, जबकि पंजाब में इस पर साढ़े 4 प्रतिशत है। हरियाणा में दालें वैट मुक्त हैं। जबकि चंडीगढ़ में पंजाब की तर्ज पर एक प्रतिशत वैट वूसूला जा रहा है।
अगले सप्ताह मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरणजीव सिंह का कहना है कि शहर का व्यापारी पंजाब व हरियाणा के मुकाबले में पहले से कई और टैक्सों के बोझ के नीचे दबा है। प्रशासन को राहत देनी चाहिए लेकिन इसके विपरीत वैट बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन वस्तुओं पर वैट बंद होना चाहिए। जिन पर पड़ोसी राज्यों में भी नहीं है। प्रशासन के अधिकारियों से अगले सप्ताह वैट कम कराने के लिए प्रतिनिधिमंडल मिलेगा।
जीरी और चावल दोनों पर मार
ग्रेन मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष राज कुमार बंसल का कहना है कि प्रशासन ने जीरी के साथ साथ चावल पर भी वैट बढ़ा दिया है। इनमें से एक ही चीज पर वैट लगना चाहिए। कुछ वस्तुओं पर पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर वैट कम करने की मांग की जा रही है। इस पर चुप्पी साधी हुई है।
जीएसटी ला रहे हैं तो वैट क्यों बढ़ाया
पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि जब जीएसटी लागू करने की तैयारी सरकार की ओर से की जा रही है। तो यह वैट क्यों बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से शहरवासियों पर पड़ोसी राज्यों के मुकाबले में दोहरी मार पड़ रही है।
रेवेन्यू आखिर कहां जा रहा है
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन का पहले ही रेवेन्यू सरपल्स है। सरप्लस रेवेन्यू कहां जा रहा है। ऐसे में वैट बढ़ाने जरूरत क्यों आन पड़ी है। प्रशासन को बढ़ा हुआ वैट वापस लेना चाहिए। उनका कहना है कि पेट्रोल पर वैट बढ़ाना काफी अन्यायपूर्ण है।