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क्षेत्र टापू में तब्दील

Sat, 06 Sep 2014 11:03 PM IST
गुरदासपुर ।
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मकौड़ा पत्तन के समीप स्थित रावी तथा उज्ज दरिया से सटा क्षेत्र टापू में तब्दील हैं। चारो तरफ से पानी से घिरा होने के कारण इस क्षेत्र में निवास करने वाले करीब तीन हजार ग्रामीण इस वक्त मुश्किल में हैं। विपरीत परिस्थिति में उन्हें जिले के शेष हिस्से से जोड़ने के लिए महज एक कश्ती का ही सहारा है। सात गांवों में बसे इन लोगों को इस बात का मलाल है कि सरकारी अमले को उनकी जान की कोई परवाह नहीं है।
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बरसात के मौसम में सरहदी जिले के करीब 3000 से ज्यादा लोग एक टापू पर बंधक की तरह जीवनयापन कर रहे हैं। दरिया में पानी ज्यादा तथा तेज बहाव के कारण यहां पूर्व में बने अस्थायी पुल का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी वे विकास की मुख्य धारा से कहीं दूर हैं।  
काबिलेगौर है कि टापू के तीसरे हिस्से पर भारत-पाक सीमा स्थित है।

जबकि एक हिस्सा दरिया खुर्द से जुड़ा है। 3000 हजार से ज्यादा की आबादी वाले इस टापू पर तूर, लसियान, चेबे, परियाल, कजले, चुम्बंरी, कूकर तथा मिमयां चक्क नामक सात गांव बसते हैं। टापू पर बसे लोगों का कहना है कि उनके लिए तीन से चार महीनों का यह बरसात का मौसम बच्चों के लिए स्कूल जाने की परेशानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के बीच गुजारना पड़ता है।
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   गांव तूर के सरपंच गुरनाम सिंह ने बताया कि टापू पर चार बीएसएफ की पोस्टें बनी हुई हैं। इसमें तास चौकी, परियाल चौकी, लसियान चौकी तथा निक्का चौकी शामिल है, जो पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ को रोकने में मददगार हैं। सरकार ने इस टापू को जिले से जोड़ने के लिए करीब 1.50 करोड़ की लागत से अस्थायी पुल बनवाया था, लेकिन बरसात के दिनों में रावी तथा उज्ज में पानी का तेज बहाव होने के चलते अब यह पुलिस अस्तित्व में नहीं है।

अब यहां ग्रामीणों के आने-जाने के लिए सिर्फ एक कश्ती की सुविधा मुहैया कराई गई है। हालांकि गत दिवस उसका भी संचालक बंद हो गया। नाविक चांदी का भतीजा गुरनाम सिंह था ने बताया कि सूरज ढलने के बाद तथा पानी ज्यादा होने के चलते नाव भी बंद हो जाती है।


सेहत सुविधाओं का अभाव  
मिमयां चक्क के सुखपाल सिंह ने बताया कि इलाका सभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सातों गांवों में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कोई भी केंद्र नही है। जबकि कई बार इलाके की गर्भवती औरतों की मौत की घटना हो चुकी है। मकौड़ा पत्तर निवासी बलविंदर सिंह ने बताया कि रावी तथा उज्ज में बाढ़ की संभावना सदा बनी रहती है। इसके चलते स्थानीय लोगों को हमेेशा अलर्ट रहने के लिए कहा जाता है।

बच्चों के लिए भी बरसात के मौसम का मतलब छु्ट्टीयां होती हैं। इलाके की करीब 150 से 200 एकड़ भूमि पानी में तेज बहाव के कारण बह चुकी है। यदि यहां अस्थायी रूप से पुल निर्माण हो तो उनकी स्थिति सुधर सकती है।
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