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हाईकोर्ट के आदेश पर भी शिक्षकों को नहीं मिली नौकरी

Sun, 15 May 2016 08:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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इसे कहते हैं किस्मत, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चयनित जेबीटी को सरकार ने नियुक्ति नहीं दी। उधर, प्राइवेट स्कूलों ने नियुक्ति का हवाला देकर नौकरी से निकाल दिया।  यह हाल है नव चयनित 9455 जेबीटी अध्यापकों का। जो अब बेरोजगारी की कगार पर खड़े हुए हैं।
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नौकरी से हाथ धो अब जेबीटी अध्यापकों ने 15 मई से अनिश्चितकालीन अनशन करने का निर्णय लिया है। ताकि, सरकार नींद से जागे और सबका साथ-सबका विकास का दावा करने वाली सरकार उनके हक के मुताबिक उनको नियुक्ति दिलाए। दरअसल, पूर्व कांग्रेस सरकार ने 2012 में 9455 जेबीटी अध्यापकों की भर्ती निकाली थी।

इन जेबीटी अध्यापकों का चयन 14 अगस्त 2014 को हुआ। लेकिन एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने नियुक्ति पत्र पर स्टे लगा दिया। 31 मार्च 2016 को हाईकोर्ट ने नव चयनित जेबीटी के पक्ष में फैसला सुनाया और नियुक्ति देने पर लगी रोक को हटा दिया। लेकिन, सरकार ने अभी तक उनकी नियुक्ति नहीं कराई।
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अदालत - फोटो : file
आदेश सुन छोड़ दी नौकरी, कुछ को निकाला
प्राइवेट स्कूलों में नौकरी करने वाले शिक्षक नियुक्ति न होने से पहले ही परेशान थे। 31 मार्च को हाईकोर्ट ने जेबीटी के हक में फैसला दे दिया और सरकार नियुक्ति पत्र पर लगी रोक हटा दी। जिससे सभी चयनित को नियुक्ति पत्र मिलने की आशा हुई और शैक्षणिक सत्र 2016-17 का एफिडेविट बांड नहीं भरा और नौकरी छोड़ दी।

जिन चयनित अध्यापकों का प्राइवेट स्कूलों को पता चल गया तो उन्होंने बीच में स्कूल छोड़ने का तर्क देकर उन्हें स्कूल से निकाल दिया। कहा, कि आपकी नियुक्ति होने वाली है और आप बाद में बीच में ही स्कूल छोड़ देंगे। इसके कारण स्कूल के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। पात्र अध्यापक संघ के मुताबिक, अब तक 3300 जेबीटी को प्राइवेट स्कूल विदाई दे चुके हैं। इनमें फरीदाबाद के करीब 250 जेबीटी हैं। 

आंदोलन ही एकमात्र रास्ता 
प्रदेश सरकार की ना-नुकुर के बाद चयनित अध्यापकों ने अब आंदोलन को एकमात्र रास्ता मान 15 मई से पंचकूला में महा पड़ाव डालने का निर्णय लिया है। महा पड़ाव से पूर्व जेबीटी एक न्याय पंचायत करेंगे। इसी दौरान यहां पर सरकार के खिलाफ विभिन्न फैसले लिए जाएंगे। इस महा पड़ाव में विभिन्न सरकारी संगठनों ने भी नव चयनित जेबीटी का साथ देते हुए आंदोलन में शामिल होने की घोषणा कर दी है। इस बार जेबीटी अध्यापकों के साथ उनका परिवार व बच्चे भी शामिल होंगे। 


जेबीटी अध्यापकों ने प्राइवेट नौकरी भी छोड़ दी। अब न उनके पास सरकारी नौकरी है और न ही प्राइवेट। सरकार की मंशा में खोट दिखाई दे रहा है। शिक्षक 20 महीने से नियुक्ति न होने से मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। अब उनका सब्र का बांध टूट चुका है। -आदेश कुमार, जिलाध्यक्ष, हरियाणा पात्र अध्यापक संघ
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