दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि स्वयंसेवी संस्थाओं के सर्वेक्षण में दिल्ली सरकार के स्कूलों की स्थिति के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हकीकत यह है कि छठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा के 87 प्रतिशत बच्चों से स्कूलों में पढ़ाई न कराकर सफाई, हाजिरी लेने, चॉक डस्टर लाने, ब्लैक बोर्ड साफ करने आदि का कार्य शिक्षक कराते हैं।
इतना ही नहीं, बच्चों को प्रयोगशाला का उपयोग करने की इजाजत नहीं दी जाती। लाइब्रेरी में पुस्तकें पढ़ने के लिए नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों के संबंध में यह तथ्य शिक्षा के मुद्दे पर काम कर रहे संगठन नौजवान भारत सभा और जागरूक नागरिक मंच ने जारी किए हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित मामले की 30 दिन के अंदर जांच करक सरकारी स्कूलों की दशा और दिशा पर मुख्यमंत्री श्वेतपत्र जारी करें। इस समिति में किसी जाने माने शिक्षाविद् व नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया जाए।