पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) में लेक्चर पूरे करने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट का मामला उजागर हुआ है। मामला किसी एक डॉक्टर या क्लीनिक से थोक में मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने का नहीं, बल्कि दो साल पहले बंद हो चुके अस्पताल के लेटर पैड पर किसी डॉक्टर द्वारा साइन कर मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने का है।
फर्जी सर्टिफिकेट मामले के खुलासे के बाद पीयू प्रशासन के अधिकारी भी सकते में हैं। सूत्रों के अनुसार दो साल पहले सेक्टर-34 में बंद हो चुके एक प्राइवेट अस्पताल के नाम पर कई मेडिकल सर्टिफिकेट पीयू स्टूडेंट्स ने लेक्चर पूरे करने के लिए अपने विभागों में जमा करा दिए। पीयू हेल्थ सेंटर भेजे सर्टिफिकेट की जांच में धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। गलत सर्टिफिकेट जमा करने वाले विद्यार्थियों पर अब गाज गिरनी तय है।
पीयू में सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। लेक्चर पूरे करने के लिए एक हफ्ते के भीतर 500 से अधिक स्टूडेंट ने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कर दिए। हद तो तब हो गई जब एक ही विभाग के 350 स्टूडेंट ने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कर दिए। इन सर्टिफिकेट की जांच के लिए पीयू हेल्थ सेंटर के कर्मचारी और डॉक्टर घंटों तक छुट्टी में भी जुटे हुए हैं।
जानकारी अनुसार पीयू स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआईएलएस) और पीयू इवनिंग स्टडीज विभाग के विद्यार्थियों ने सबसे अधिक मेडिकल सर्टिफिकेट जमा किए हैं। 50 से 70 स्टूडेंट ने एक ही क्लीनिक और अस्पताल से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाए हैं। स्टूडेंट को मेडिकल सर्टिफिकेट से अधिकतम 15 दिन का लाभ मिल सकता है लेकिन स्टूडेंट ने 3 महीने तक के झूठे सर्टिफिकेट्स जमा कराए हैं।
यह है मामला
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- फोटो : File
सेक्टर-34 ए के एससीओ 341-342 में दो साल पहले एनआईएनएस ब्रेन एंड स्पाइन अस्पताल बंद हो चुका है। लेकिन अस्पताल के लेटर पैड पर डॉ.आरके गुप्ता की स्टांप और सिग्नेचर वाले कई सर्टिफिकेट स्टूडेंट ने पीयू में जमा कराए हैं। इस मामले में जब अमर उजाला ने डॉ.आरके गुप्ता से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद ऐसा कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं किया। उन्होंने पूरे मामले की जांच करने की बात कही है। उधर पीयू प्रशासन भी मामले में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और पंजाब मेडिकल काउंसिल को चिट्ठी लिखकर मामले में कार्रवाई को लिखेगा।
स्टूडेंट ने माना पैसे देकर बनवाए सर्टिफिकेट
मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए स्टूडेंट से पूछताछ हुई तो पूरा भेद खुल गया। मामला पुलिस में जाने के डर के बाद कुछ स्टूडेंट ने लिखित में माफी मांगी है। विद्यार्थियों ने माना कि उन्होंने 1000 से 2000 रुपये में झूठे सर्टिफिकेट बनवाए हैें। खुलासे के बाद पीयू हेल्थ सेंटर ने जमा हुए सभी मेडिकल सर्टिफिकेट की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
सरकारी मेडिकल सर्टिफिकेट में भी गोलमाल
पीयू स्टूडेंट को फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने में सिर्फ प्राइवेट क्लीनिक या अस्पताल के डॉक्टर ही शामिल नहीं है। पीयू के विभागों में कुछ स्टूडेंट ने शहर की सरकारी डिस्पेंसरी के कार्ड पर भी गलत तरीके से एक महीने का मेडिकल बनवाया हुआ है। सेक्टर-19 की डिस्पेंसरी से भी एक डॉक्टर ने कमर में दर्द होने पर एक महीने का मेडिकल सर्टिफकेट जारी कर दिया। ऐसे मामलों में भी पीयू अब यूटी प्रशासन को शिकायत पत्र भेजने जा रही है।
जल्द ही पुलिस में मामला दर्ज कराऊंगा
रिपोर्ट में मार्च माह में अधिक खर्च सामने आया है।
कोट्स ..
दो साल पहले ही हमारा सेक्टर-34 का अस्पताल बंद हो चुका है। मुझे पीयू हेल्थ सेंटर सीएमओ से मेडिकल सर्टिफिकेट की इन्क्वायारी आई थी। डॉ.आरके गुप्ता नाम के डॉक्टर ने कभी अस्पताल में ज्वाइन नहीं किया । यह पूरी तरफ धोखाधड़ी है। जल्द ही पुलिस में मामला दर्ज कराऊंगा।
डॉ. अनुपम जिंदल हेड ( बंद हो चुके सेक्टर-34 एनआईएनएस ब्रेन एंड स्पाइन हॉस्पिटल)
कोट्स ..
फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के मामले में पीयू हेल्थ सेंटर ने सीएमओ को स्टूडेंट और फर्जी सर्टिफिकेट देने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इस बारे में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और पंजाब सरकार के मेडिकल बोर्ड को भी सूचित किया जाएगा। इस बार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रो.एके भंडारी, डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन पीयू )
कोट्स ..
स्टूडेंट द्वारा जमा किए गए तमाम मेडिकल सर्टिफिकेट में बड़े स्तर पर खामियां हैं। पूरे मामले में मैंने पीयू के उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी है। जाली सर्टिफिकेट जारी करने और देने वालों पर कार्रवाई के लिए भी पीयू प्रशासन को लिखा जाएगा।
डॉ. देवेंद्र धवन ,सीएमओ पीयू हेल्थ सेंटर