फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PU: पद्मभूषण डॉ. आहलुवालिया ने दिया ‘स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट' पर लेक्चर

Fri, 22 Apr 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पद्मभूषण डॉ. ईशर जज आहलुवालिया का व्याख्यान - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने का सरकार का फैसला काफी अच्छा है, लेकिन पहले हमें स्मार्ट सिटी के कंसेप्ट को समझना होगा।  सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में स्मार्ट सिटी की सबसे अच्छी परिभाषा दी थी। जो लोग बेहतर गवर्नमेंट और गवर्नेंस की मांग करें, जिन्हें प्रशासनिक सुधारों और हाई टेक्नोलॉजी के माध्यम से सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकें।
विज्ञापन


उसे ही स्मार्ट सिटी कहा जा सकता है। वीरवार को अर्बन प्रोजेक्ट पर कई सालों से काम कर रही पद्मभूषण डॉ. ईशर जज आहलुवालिया ने यह विचार स्मार्ट सिटी से जुड़े सवालों को लेकर रखे। डॉ. आहलुवालिया पंजाब यूनिवर्सिटी में रोल ऑफ सिटीज इन इंडिया डेवलेपमेंट थीम पर आयोजित लेक्चर देने पहुंची थीं।

देशभर में स्मार्ट सिटी के कंसेप्ट को लेकर डॉ. आहलुवालिया ने कई मुद्दों को सांझा किया। डॉ. आहलुवालिया ने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय प्रशासन को अधिक शक्तियां और बजट दिया जाना चाहिए। लोकल बॉडी को जरूरत के हिसाब से टैक्स और अन्य सरचार्ज लगाने की छूट मिलनी चाहिए। इस समय देश की जीडीपी का दो तिहाई अर्बन क्षेत्र से मिलता है। अगर नए शहरों की ग्रोथ सही तरीके से नहीं हुई तो ग्रोथ रुक जाएगी।
विज्ञापन


उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने 2500 स्थानों को टाउन के तौर पर विकसित करने का प्रोग्राम बनाया था, लेकिन अभी तक 250 स्थानों की ही नोटिफिकेशन हो पाई है।

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर का जीडीपी में 8 से 10 फीसदी योगदान है। भविष्य में अर्बन क्षेत्र का विकास काफी तेजी से होगा। उन्होंने माना कि पिछले कुछ समय में कृषि क्षेत्र की ग्रोथ 2 फीसदी रही है, लेकिन इसे 4 से 4.5 फीसदी तक बढ़ाना होगा। सरकारों द्वारा चुनाव के समय ही टैक्स माफी करने जैसे लुभावनी घोषणाओं को डॉ.अहलुवालिया ने शहरों की प्रगति के लिए काफी गलत बताया। 

प्र्रशासन के प्रोजेक्ट के कारण चंडीगढ़ रेस में पिछड़ा
डॉ. अहलुवालिया ने माना कि चंडीगढ़ में लोगों को स्मार्ट सिटी की तरह अधिकतर सुविधाएं मिल रही हैं। चंडीगढ़ में लोगों को बिजली, पानी के साथ 100 फीसदी सीवरेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था की हुई है। उन्होंने स्मार्ट सिटी की लिस्ट से बाहर होने का कारण अधिकारियों द्वारा प्रोजेक्ट को सही तरीके से तैयार न करना बताया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशिक्षण की बात भी रखी। डॉ. आहलुवालिया ने कहा कि सिर्फ बड़े शहर ही स्मार्ट सिटी के काबिल नहीं हो सकते।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें