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हौसले की उड़ान से पाई सफलता : दूसरों की किताबों से पढ़कर निशा ने पाए 92 प्रतिशत अंक

Thu, 19 May 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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परीक्षा परिणाम देख कर खुशी मनाती छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
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जज्बा और लगन हो तो आर्थिक कमजोरी भी पढ़ाई में बाधक नहीं बन सकती। जिले के खराब परीक्षा परिणाम के बावजूद कई होनहारों ने परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की इन बेटियों ने अच्छे अंक लाकर अपने परिवार का नाम रोशन किया है।
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दूसरों की किताबों से पढ़कर निशा ने पाए 92 प्रतिशत अंक
राहुल पब्लिक स्कूल की निशा ने बोर्ड की परीक्षाओं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। स्कूल प्रबंधन की तरफ से जिले में टॉपर होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि बोर्ड की तरफ से टॉपरों की सूची जारी नहीं की गई है। निशा ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। 

उनके पिता होटल में काम करते है। परीक्षाओं के दौरान दूसरों की किताबें लेकर तैयारी की। वह सिविल सर्विस में जाना चाहती है। अगर सिविल सर्विस में चयन नहीं होता है तो वह शिक्षक बनकर देश की सेवा करेंगी।
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91 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली मोनिका - फोटो : अमर उजाला
टेलर की बेटी मोनिका ने प्राप्त किए 91 प्रतिशत अंक
एनआईटी स्थित कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी की छात्रा मोनिका ने कॉमर्स स्ट्रीम में 91 प्रतिशत अंक लेकर अपने माता-पिता के साथ स्कूल का नाम रोशन किया है। मोनिका ने बताया कि सरकारी स्कूल में पढ़ना उसकी मजबूरी थी।   क्योंकि उसके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मोनिका ने बताया कि उसके पिता ट्रेलर है और मां गृहणी है। मोनिका के पिता दिन-रात कपड़ों की सिलाई कर तीन भाई-बहनों को पढ़ा रहे हैं। मोनिका सिविल सेवा में जाना चाहती है।
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मेधावी छात्रा को मिठाई खिलातीं अध्यापिकाएं - फोटो : अमर उजाला
परीक्षा में फेल हुए जीवन में नही

फेल होने को करियर समाप्त होना समझना गलत है। बल्कि यह एक ऐसा पड़ाव है जहां से छात्र अपनी गलतियों को सुधार कर आगे बढ़ सकते हैं। अगर छात्र अपनी गलतियों को सुधार कर आगे बढने की प्रेरणा लेंगे तो वह निश्चित रूप से कामयाब होंगे।

परीक्षा में फेल होना जीवन में फेल होना नहीं समझना चाहिए। भिवानी बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणाम में फरीदाबाद के  12717 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। जिनमें 5584 विद्यार्थी पास हुए हैं। मनोचिकित्सक डॉ. लव कौशिक ने बताया कि विद्यार्थी को फेल होने पर निराश नही होना चाहिए।   यह एक ऐसा समय होता है कि इसमें ज्यदातर बच्चे समझ नहीं पाते कि उनको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। इसलिए अभिभावकों को फेल हुए छात्रों को भला-बुरा नही कहना चाहिए। ऐसे में अभिभावक बच्चों को प्रेरणा दें और उन्हें समझाना चाहिए कि अगर वो इस बार सफल नही हुए तो आगे अच्छी तैयारी करके  पास हो सकते हैं। डॉ. कौशिक ने बताया कि फेल होने वाले विद्यार्थियों के प्रति अभिभावकों को नकारात्मक सोच नहीं रखनी चाहिए। ऐसे में विद्यार्थी गलत कदम उठा लेते हैं।
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