बीएड की प्रवेश परीक्षा कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया।
पंजाब के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस पास करने वाले छात्रों को एमडी कोर्स में दाखिले के लिए मिली राहत हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। हाइकोर्ट ने उस अपील को खारिज किया है, जिसमें एमडी कोर्स में पंजाब डॉमिसाइल की शर्त खत्म करने को चुनौती दी गई थी। ये राहत पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से ही दी गई थी। जस्टिस एसएस सारों एवं जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने लंबी बहस के बाद वीरवार को अपील खारिज कर दी है।
एकल बेंच द्वारा पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में राज्य कोटे की 40 फीसदी आरक्षित सीटों में पंजाब के रिहायशियों के लिए आरक्षित स्टेट कोटे की 60 फीसदी सीटों का प्रावधान रद्द करने के एकल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है। डिवीजन बेंच ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी को संस्थान के आधार पर ही इन सीटों पर दाखिले की काउंसलिंग करने का निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि इस विवाद पर में पहले ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से बार-बार कहा जा चुका है कि राज्य अपने मेडिकल कॉलेजों में संबंधित राज्य का निवासी होने को आधार बनाकर सीटें आरक्षित नहीं कर सकते। दाखिले शैक्षणिक प्राथमिकता के आधार पर दिए जाने चाहिए। इसके बावजूद पंजाब में 40 प्रतिशत सीटों में 60 फीसदी स्टेट कोटा रख दिया गया था, जिसे पंजाब के कालेजों से एमबीबीएस पास करने वाले राज्य के बाहर के छात्रों ने चुनौती दी थी और एकल बेंच ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए यह स्टेट कोटा खत्म कर दिया था।
बेंच ने संस्थान के आधार पर इन सीटों पर दाखिले का आदेश दिया था। एकल बेंच के इस फैसले को पंजाब के रिहायशी छात्रों और पंजाब सरकार ने अपील के माध्यम में डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। बुधवार से लगातार दो दिन अपीलीय छात्रों के वकीलों ने बेंच के समक्ष तमाम दलीलें दीं, लेकिन वीरवार को बेंच ने किसी भी दलील को मानने से इनकार कर दिया।
बेंच का कहना है कि अपीलीय छात्र कोई भी कानून या जजमेंट के माध्यम से एकल बेंच के फैसले को रद्द करने में उपयुक्त दलील नहीं दे सके हैं। बेंच ने एकल बेंच का फैसला रद्द करने से इनकार करते हुए यूनिवर्सिटी को एमडी कोर्सेज में संस्थान के आधार पर दाखिलों की काउंसलिंग करने का निर्देश दिया है।