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जेएनयू विवाद : खालिद और भट्टाचार्य के निलंबन पर भी रोक

Sat, 28 May 2016 02:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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खालिद व अनिर्बान
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हाईकोर्ट ने देशद्रोह के मामले में आरोपी जेएनयू के छात्र उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य को भी राहत प्रदान कर दी। अदालत ने दोनों के निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि जब तक निलंबन के खिलाफ संबंधित अथॉरिटी उनकी अपील पर निपटारा नहीं करती तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।
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न्यायमूर्ति मनमोहन ने दोनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याची भी 13 मई को प्रदान जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया व अन्य के समान राहत प्राप्त करने के अधिकारी हैं। अदालत ने कन्हैया व अन्य के निलंबन पर रोक लगा रखी है।

इससे पूर्व याची के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि जेएनयू प्रशासन ने उनके मुवक्किलों को बिना मौका प्रदान किए ही एकतरफा कार्रवाई में निलंबित कर दिया है। उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य ने कन्हैया व अन्य से पहले फैसले को चुनौती दी थी।
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जिस पर अदालत ने जेएनयू प्रशासन व अन्य से जवाब मांगा था और मामले की सुनवाई 30 मई तय थी। इसी बीच दोनों ने नए सिरे से याचिका दायर कर राहत मांगी थी।

अदालत ने 13 मई को दिए फैसले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित अन्य छात्रों के निलंबन व जुर्माने पर सशर्त रोक लगा दी थी। अदालत ने उन्हें अपने निलंबन व जुर्माने संबंधी उच्चाधिकार कमेटी की सिफारिश व निर्णय को संबंधित जेएनयू अथॉरिटी के पास अपील करने का निर्देश दिया था।
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अदालत ने कहा कि मामले की हल शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाना चाहिए

अदालत ने यह रोक छात्रों द्वारा भूख हड़ताल खत्म करने के आश्वासन पर लगाई थी। न्यायमूर्ति मनमोहन ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि छात्र तुरंत प्रभाव से अपनी भूख हड़ताल खत्म करेंगे और वे किसी भी प्रकार से धरना या प्रदर्शन इत्यादि नहीं करेंगे।

अदालत ने कहा कि मामले की हल शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाना चाहिए, यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह अंतरिम आदेश निष्प्रभावी रहेगा। कन्हैया सहित आठ अन्य छात्रों ने भी देशद्रोह मामले के बाद उन पर कैंपस में प्रवेश व जुर्माने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने कन्हैया के अलावा अश्वती ए नैर, एशवर्य अधिकारी, कोमल मोहित, चिंटू कुमारी, अश्वेता चक्रवर्ती व दो अन्य द्वारा जेएनयू प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया।
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