दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में दाखिले की दौड़ के साथ दो हजार सीटें बढ़ने से साइबर सिटी के छात्रों को फायदा होगा। 12वीं कक्षा की परीक्षा दे चुके छात्र डीयू प्रशासन के इस फैसले से बेहद उत्साहित हैं। बता दें कि डीयू के कॉलेजों में इस बार 57 हजार सीटें होगी।
दरअसल, साइबर सिटी के छात्रों की पहली पसंद दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज होते हैं। आवेदन प्रक्रिया जल्दी शुरू होने के कारण कॉमर्स और साइंस के लिए डीयू के बेस्ट कॉलेज में पहले मारामारी होती है। उसके बाद बाकी कॉलेजों का नंबर आता है, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों छात्रों को मौका नहीं मिलता है और सीटें खत्म हो जाती है।
से देखते हुए डीयू प्रशासन ने कॉलेजों के अनुसार सीटें बढ़ाने का निर्णय लिया है। इनमें अधिकांश साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के ऑनर्स कोर्स हैं। यहां के छात्रों की पहली पसंद ऑनर्स होती है। इससे छात्रों को फायदा होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक कटऑफ होने की वजह से सीटें जल्दी भर जाती हैं और फिर कम अंक वाले छात्रों को दाखिला लेने में दिक्कत होती है। उन्हें दूसरे या तीसरे कटऑफ का इंतजार करना होता है। कई अच्छे कॉलेजों में तो छात्रों को दूसरे के नाम कटवाने का भी इंतजार होता है।
एडमिशन विशेषज्ञ डॉ. श्याम बरवाला कहते हैं कि अगर सीटें बढ़ जाती हैं तो पहले कटऑफ में भी अधिक छात्रों को जगह मिलेगी। जिसका असर कई कॉलेजों पर पड़ेगा। एक से अधिक कॉलेजों में छात्र एडमिशन के लिए आवेदन करते हैं और टॉप छात्रों का कई कॉलेजों में नाम आ जाता है।
खिला किसी एक में ही लेते हैं। इससे दूसरे छात्रों को नुकसान होता है। जबकि सीट बढ़ने से उससे कम अंक वाले छात्रों को फायदा होगा। छात्रों का कहना है कि नए कॉलेजों में सीटें बढ़ने से आवेदन का मौका भी अधिक होगा।