बाहर किए गए शिक्षकों को समायोजित करने, 15 हजार मानदेय का वादा पूरा करने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों ने मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया। स्थायी पदों पर तैनाती के बाद दोबारा जिला स्तर पर अतिथि शिक्षकों का पूल तैयार करने के फैसले से खफा शिक्षकों का कहना है कि वह मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
राजकीय अतिथि शिक्षक संघ की ओर से शिक्षकों ने आंदोलन शुरू किया। इस क्रम में सोमवार को कैंडल मार्च निकालने के बाद मंगलवार को काली पट्टी बांधकर विरोध किया। यह आमरण अनशन बुधवार से शुरू होना था लेकिन मंगलवार को शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों की पदोन्नति, एलटी और प्रवक्ता पदों पर तैनाती दस दिन में किए जाने और इसके बाद रिक्त पदों के सापेक्ष अतिथि शिक्षकों का पूल बनाए जाने की घोषणा के बाद अतिथि शिक्षकों ने मंगलवार को ही आमरण अनशन शुरू करने का फैसला लिया।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
फैसले के बाद अतिथि शिक्षक सौरभ विद्वान, आरती उनियाल, नवनीत नेगी, अमृता नौटियाल, दुर्गेश डंडरियाल, भुवन ठाकुर, जयदेव चौहान, चंद्रदेव चौहान, जगत सिंह और हीरा सिंह आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
संघ अध्यक्ष शांतिस्वरूप और महामंत्री कविंद्र सिंह ने कहा कि वह मांग पूरी होने तक आंदोलन को जारी रखेंगे। दूसरी ओर, अतिथि शिक्षकों के बीच पहुंचे मसूरी विधायक गणेश जोशी ने भी शिक्षकों की मांग को सही ठहराते हुए मामले में जल्द राज्यपाल से मिलने का आश्वासन दिया।
उधर, अतिथि शिक्षकों ने राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। उन्होंने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की। इस मौके पर आंदोलन के अध्यक्ष ललित डंगवाल, देहरादून अध्यक्ष विवेक यादव और संतोष दुबे ने कहा कि वे अंतिम सांस तक अपने हक के लिए लड़ेंगे।