प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अरायान को गति देते हुए नूंह में राजलीला मैमोरियल ट्रस्ट एक नई पहल की हैं। जिसके मुताबिक ट्रस्ट ने गुडिया रानी योजना की शुरूआत करते हुए बेटियों को मुत शिक्षा देनी शुरू की हैं।
शिक्षा के साथ ही उन्हें मुत किताबें, स्टेशनरी, पेन-पेंसिल भी दी जाती हैं और उन्हें आकर्षित करने के लिए मिठाईयां व फल आदि भी दिए जाते हैं।
करीब एक माह पहले ही शुरू की गई इस योजना का काफी सकारात्मक असर भी दिखाई देने लगा है और इस अल्पावधि में 35 बेटियां योजना का हिस्सा बनकर शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
यहां यह भी विशेष है कि बच्चियों के साथ दो महिलाएं भी इस योजना से जुडकर अक्षर ज्ञान प्राप्त कर रही हैं। ट्रस्ट की संचालिका ममता कौशिक ने बताया कि इस योजना के तहत उन सभी बच्चियों व महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है जो या तो अपनी पढाई अधूरी छोड चुकी है या फिर कभी स्कूल गई ही नहीं।
मुस्लिम बच्चियों की अधिकता: जैसा की मेवात में देखा जाता है कि बेटियों की पढाई को लेकर मुस्लिम समुदाय काफी उदासीन हैं। रूढिवादी सोच के चलते वे लडकियों को पढना जरूरी नहीं समझते।
गडिया रानी योजना से जुडी 35 छात्राओं में से 28 लडकियां मुस्लिम समुदाय से हैं। उनके मां-बाप को विश्वास में लेकर ट्रस्ट की संचालिका इन बच्चियों के हाथों में घास काटने की दराती की बजाए कलम देने में सफल हो पाई हैं।
उन्होंने बताया कि उनके पास जो लडकियां पढ रही हैं उनमें ज्यादातर लडकियां 8 से 14 वर्ष के आयुवर्ग की हैं और इनमें एक 22 वर्षीय सीमा नामक महिला भी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
हालांकि इस योजना को शुरू हुए अभी केवल एक माह ही बीता है और वे लगातार लोगों से संपर्क कर ऐसी बच्चियों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
व्हीकल की सुविधा: इस योजना में अभी तो नूंह शहर की बच्चियां ही शामिल हुई है। लेकिन योजना को पूरे क्षेत्र में विस्तार किया जाना है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली बच्चियों के लिए निशुल्क यातायात की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
बच्चियों को फिलहाल अक्षरज्ञान दिया जा रहा है और उनकी प्रतिभा व विषय पर पकड के हिसाब से कक्षाओं में विभाजित किया जा रहा हैं। नूंह बार एशोसिएशन के पूर्व प्रधान ताहिर रुपडिया, शहरवासी एडवोकेट राजेश छोकर, समाजसेवी नरेंद्र पटेल, नरेंद्र शमा आदि का कहना है कि ममता कौशिक ने बच्चियों की शिक्षा को आगे बढाने के लिए जो पहल की है, वह सराहनीय हैं।
लोगों को चाहिए कि वे शिक्षा के मामले में अपने बच्चों में किसी प्रकार का भेदभाव न बरतें और उन्हें उनकी रुचि के हिसाब से बेहतर शिक्षा दिलाएं ताकि वे पढ-लिखकर समाज और देश के विकास में भागीदार बन सकें।