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एंट्रेंस टेस्ट के बाद ही मिलेगा बीएड में प्रवेश

Sun, 03 Apr 2016 11:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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बीएड की प्रवेश परीक्षा कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय नए शैक्षणिक सत्र 2016 में बीएड कोर्स में प्रवेश के लिए पहले की तरह इस बार भी प्रवेश परीक्षा करवाएगा। बीएड में प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर ही प्रवेश मिलेगा। पिछली बार निजी कॉलेजों में प्रवेश के लिए छूट दे दी गई थी।
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प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल तय करने के लिए शनिवार को विवि में डीएस की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में शिक्षा विभाग, प्रदेश सरकार और एचपीयू के शिक्षा विभाग मुखिया सहित डीन और विवि के अधिकारी भी मौजूद रहे। इसकी पुष्टि विवि के कुलसचिव डा. पंकज ललित ने इसकी पुष्टि की है।

बैठक में फैसला लिया गया कि इस बार भी बीएड की प्रवेश परीक्षा करवाई जाएगी। इसके लिए विवि के शिक्षा विभाग की ओर से तय शेड्यूल को मंजूरी दे दी गई। एनसीटीई के नियमों के तहत बीएड की प्रवेश की प्रक्रिया को तय 60 दिनों में हर हाल में पूरा किया जाएगा।
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बैठक में मौजूद अधिकारियों और शिक्षाविदों के बीच लंबी चरचा के बाद आम सहमति बनी कि धर्मशाला में स्थित प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग के संस्थान और एचपीयू के शिक्षा विभाग की बीएड की सीटों को प्रवेश परीक्षा की मेरिट आधार पर ही भरा जाएगा। इन दोनों संस्थानों में टॉप मेरिट वाले छात्रों के प्रवेश लेने और उन्हें फीस में दी जाने वाली छूट को देखते हुए प्रवेश परीक्षा करवाना जरूरी है।

इसके लिए जल्द प्रवेश परीक्षा शेडयूल जारी कर दिया जाएगा। 15 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। बैठक में आम सहमति बनी कि पिछले सत्र से एनसीटीई के नए नियमों के तहत शुरू किए दो वर्षीय बीएड कोर्स और उसके लिए नियमों के 100 दिन की कक्षाओं की शर्त को पूरा करने के लिए एक जुलाई से हर हाल में नए सत्र की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।

विवि को तय 60 दिन में कक्षाओं से पहले प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बीएड प्रवेश परीक्षा पर फैसला लेने को हुई कमेटी की बैठक में विवि की डीएस प्रो. गिरीजा शर्मा, विवि के कुलसचिव डा. पंकज ललित, परीक्षा नियंत्रक डा. जेएस नेगी, शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा अतिरिक्त निदेशक डा. अमर देव, उप सचिव शिक्षा पुष्पा चौधरी, डीन शिक्षा एचपीयू प्रो. एसके शर्मा, विवि के शिक्षा विभाग चैयरमेन प्रो. सुदर्शना राणा, धर्मशाला शिक्षा संस्थान के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

सीटें खाली रहने का खतरा बरकरार- विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 70 निजी बीएड कॉलेजों में साल दर साल सीटें खाली रहने का खतरा बराबर बना हुआ है। कोर्स दो साल का किए जाने के बाद से करीब साढ़े आठ हजार में से 60 फीसदी सीटें खाली रह रही हैं। ऐसे निजी कॉलेजों के लिए बाद में यह राहत मिल सकती है।
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