हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर के सभी विभागों, रीजनल सेंटर धर्मशाला (खनियारा)और विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों में चल रहे पीजी डिग्री, कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब पीजी कोर्स में प्रवेश लेने के लिए क्रेंद्रीयकृत प्रणाली के तहत छंटनी परीक्षा होगी। इसी के आधार पर ही कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा।
इसके लिए विवि सभी कॉलेजों और रीजनल सेंटर में प्रवेश के लिए लिए केंद्रीयकृत प्रणाली के आधार पर छंटनी परीक्षा आयोजित करेगा। इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 7 से बढ़ाकर 16 मई तय की गई है । एचपीयू की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाई गई नई विवरणिका में तिथियां दर्शाई गई हैं। इसमें आवेदन फार्म के साथ विस्तृत ब्योरा भी उपलब्ध है।
विवि की अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. गिरीजा शर्मा ने जारी जानकारी में कहा कि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र खनियारा और सभी संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश के लिए इच्छुक छात्र-छात्राओं को छंटनी परीक्षा घोषित होने के बाद अलग से इन संस्थानों में प्रवेश के लिए आवेदन भी करना होगा। प्रो. गिरिजा शर्मा ने बताया कि दाखिले के लिए छंटनी परीक्षा पूरे प्रदेशभर के चार परीक्षा केंद्रों में होगी।
इनमें मंडी, हमीरपुर, रीजनल सेंटर खनियारा धर्मशाला और प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षार्थी को परीक्षा केंद्र भरते समय कम से कम दो केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर विकल्प के रूप में भरना होगा। सभी छंटनी परीक्षाओं में बैठने के लिए फार्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ा कर 16 मई कर दी गई है।
केंद्र तभी बनेगा, यदि वहां छात्रों की संख्या सौ से अधिक होगी। प्रवेश परीक्षाएं नौ जून से शुरू होंगी, अधिक जानकारी के लिए विवि की वेबसाइट www.hpuniv.in पर इससे संबंधित विस्तृत जानकारी, आवेदन फार्म और सीट आवंटन की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाई गई है।
रूसा का पहला बैच पास आउट होने पर बदली है प्रक्रिया
एचपीयू से संबद्ध कॉलेजों से रूसा सीबीसीएस के तहत पास आउट होने वाले पहले यूजी कोर्स के बैच के कारण पीजी में प्रवेश की प्रक्रिया को बदलना पड़ा है। पहले यूजी की मेरिट के आधार पर पीजी कोर्स में प्रवेश मिल जाता था। कुछ ही विषयों के लिए प्रवेश परीक्षा होती थी। यूजी सीबीसीएस कोर्स में सीजीपीए एक समान होने से मेरिट तैयार करने में पेश आने वाली समस्या को हल करने के लिए कें द्रीयकृत छंटनी परीक्षा करवाने का फार्मूला अपनाया गया है।