मुख्य सचिव पी. मित्रा स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
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हाईकोर्ट के आदेशानुसार हिमाचल सरकार ने प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों की जांच शुरू कर दी है। जिला स्तर पर कमेटियां गठित कर दी गई हैं। निजी स्कूलों से उपायुक्तों के माध्यम से फीस का ब्योरा मांगा गया है। निजी स्कूलों में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं की जांच करने में शिक्षा महकमा जुट गया है। जिलों से एकत्र रिपोर्ट को राज्य सरकार का भेजा जाएगा। राज्य स्तर पर कमेटी गठित करने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। मुख्य सचिव पी. मित्रा स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों में मनमानी फीस पर हाईकोर्ट ने जांच कमेटी बनाने को कहा था। 27 अप्रैल को न्यायाधीश तरलोक चौहान ने मूलभूत सुविधाओं, मान्यता और मनमाने ढंग से वसूली जा रही फीस को लेकर कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने निजी स्कूलों समेत प्रदेश भर के निजी कॉलेजों, कोचिंग सेंटर, किसी भी नाम से चलने वाले एक्सटेंशन सेंटर और विश्वविद्यालयों की जांच के आदेश दिए हैं।
इसी कड़ी में राज्य सरकार ने निजी शैक्षणिक संस्थानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मुख्य सचिव सहित अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा, उच्च शिक्षा निदेशक अपने-अपने स्तर पर इस मामले को देख रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव पी. मित्रा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार कमेटी गठित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिलों से भी ब्योरा तलब किया गया है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।